संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव आंबेडकर अध्ययन केंद्र में मंगलवार को ‘भक्ति और विज्ञान’ भारत की एक गौरवशाली तथा समृद्ध परंपरा पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि गुजरात स्थित सारंग गुरुकुल, प्रशिक्षण संस्थान के प्रमुख आचार्य संत स्वामी भद्रेशदास तथा दिल्ली स्थित अक्षरधाम-मंदिर के संचालक व उत्तर भारत के प्रमुख आचार्य मुनि वत्सल उपस्थित रहे।
भद्रेशदास ने सेंटर फॉर डॉ. बीआर आंबेडकर स्टडीज के मुख्य प्रवेश द्वार पर प्रार्थना पाठ किया। उन्होंने संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास जी महाराज के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें पुष्प अर्पित किए। उन्होंने भारत की सनातन हिंदू संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि इसी हिंदू संस्कृति के बल पर हम आज तक दुनिया को सुख शांति का संदेश दे रहे हैं।
दुनिया के किसी भी कोने में अगर एक भी भारतीय हैं तो वह अपने देश और परिवार से मिले संस्कारों के बल पर अपनी एक पहचान बनाता है और भारत के गौरव को बढ़ाता है। अमेरिका में 268 एकड़ में बनने वाले अक्षरधाम मंदिर के बारे में उन्होंने कहा कि वह मंदिर शीघ्र ही एक बड़ा स्वरूप प्राप्त कर लेगा। उन्होंने गीता, उपनिषद और भारतीय धर्मग्रंथों में लिखित भारतीय ज्ञान विज्ञान को जानने पर बल देते हुए कहा कि इन महान ग्रंथों में अध्यात्म और विज्ञान पर शोध करके आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित करना चाहिए।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर केंद्र के सहायक निदेशक डॉ. प्रीतम सिंह ने संत गुरु रविदास और संविधान निर्माता बाबा साहेब आंबेडकर के चित्रों का स्मृति चिह्न प्रदान कर स्वामी भद्रेशदास, मुनि वत्सल एवं अन्य संत जनों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर डॉ. प्रदीप चौहान, डॉ. वीरेंद्र खटकड़, उपकुलसचिव डॉ. जितेंद्र कुमार, डॉ. विजय कुमार, डॉ. संतोष दुबे, डॉ. अनिल आर्य, डॉ. दिग्विजय ठाकुर, डॉ. अंग्रेज सिंह, डॉ. टीआर कुमार, डॉ. सुनील कुमार, सहायक दलबीर मान व विक्रम सिंह आदि मौजूद रहे।