अगले माह से ही शुरू होने जा रहे नए शिक्षा सत्र में भी हर बार की तरह समय पर छात्रों को मुफ्त पाठ्य पुस्तकें मिलने की संभावना न के बराबर दिखाई देने लगी है। शायद इसी के चलते ही अब विभाग ने वर्तमान सत्र में पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों को दी गई पाठ्य पुस्तकों से ही नए सत्र के नए विद्यार्थियों की पढ़ाई करवाने का मन बनाया है। इन विद्यार्थियों का अब इन पुरानी पाठ्य पुस्तकों से ही स्वागत होगा, जिन्हें विभाग ने एकत्रित करने की कार्य भी शुरू कर दिया है। विभाग के इस संबंध में निर्णय लिए जाने उपरांत जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी ने इस संबंध में सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश भी जारी कर दिए है।
जिनमें स्पष्ट किया गया है कि शिक्षा सत्र 2016-17 के लिए जिन विद्यार्थियों को मुफ्त पाठ्य पुस्तकें दी गई है, उनसे सत्र पूरा होने उपरांत वापस एकत्रित किया जाए। यहां तक सभी स्कूलों की इस संदर्भ में रिपोर्ट भी भेजी जाए। यह निर्देश मिलते ही सभी स्कूल मुखियाओं को खंड शिक्षा अधिकारियों की ओर से अवगत करवा दिया गया है। बता दें कि एसएसए की ओर से शिक्षा का अधिकार नियम के तहत कक्षा एक से आठवीं तक सरकारी स्कूलों के सभी विद्यार्थियों को मुफ्त पाठ्य पुस्तकें दी जाती है। लेकिन यह पुस्तकें अब तक विभाग किसी भी सत्र में समय पर उपलब्ध नहीं करवा पाया है।
कई बार सत्र के चार से छह माह बीत जाने पर विद्यार्थियों को यह पुस्तकें मिल पाती है तो विभाग को भी कड़ी जद्दोजहद करनी पड़ती है। समय पर पुस्तकें न मिलने से जहां विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है बल्कि विभाग की किरकरी भी होती रही है। सूत्रों की मानें तो ऐसे में इस बार विभाग ने कुछ राहत पुरानी पाठ्य पुस्तकों के सहारे लेने का प्रयास किया है, जबकि विभाग को इस बार भी समय पर पुस्तकें मिलने की आशंका दिखाई देने लगी है, जिसके चलते यह सभी पुस्तकें एकत्रित करने के आदेश जारी किए गए है।
नए सत्र में काम आएंगी पुस्तकें : सुमन आर्य
पुरानी पुस्तकें वापस लिए जाने को लेकर जारी किए आदेशों पर जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी से संपर्क नहीं हो पाया, लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी ने माना कि इस संबंध में उच्चाधिकारियों की ओर से आदेश मिले है। वहीं सिलेबस रहना है तो पुरानी पुस्तकें भी अगले सत्र में बच्चों के काम आ जाएंगी। विभाग नई पुस्तकें भी प्रकाशित करवाने की पूरी कार्रवाई कर चुका है।