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मौत के करीब से मरीज को वापस लाने वाला डॉक्टर बताता है जिंदगी की सही कीमत

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सच कहते हैं जीवन जीना एक कला है, कई बार मौत के करीब से व्यक्ति को वापस लाने वाला डॉक्टर उसकी सही कीमत बता जाता है। उक्त पंक्ति उन सभी डॉक्टरों को समर्पित हैं जो कोरोना वायरस जैसी घातक महामारी के इस दौर में भी डटकर मुकाबला कर रहे हैं। जब से देश में कोरोना वायरस ने दस्तक दी है तभी से अपने परिवार से दूरी बनाए रखना, पीपीई में ड्यूटी करते वक्त घंटों पसीने में नहाए रहना। मरीज का उपचार करने के साथ ही खुद को इंफेक्शन से बचाना और कोरोना को हराने के लिए जी-जान से लड़ना, ये उन सभी कोरोना योद्धाओं की कहानी है जो इस महामारी के दौर में मरीजों को नया जीवन दान देने में जुटे हुए हैं।
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कोरोना संक्रमण के खतरे के कारण परिवार से अलग रहना मजबूरी : डॉ. गौरव
एलएनजेपी अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. गौरव चावला का कहना है कि कोरोना संक्रमण के खतरे के कारण परिवार से अलग रहना उनकी मजबूरी है। वे भी अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ सुकून के पल बिताना चाहते हैं, लेकिन खुद की सुरक्षा के साथ-साथ परिवार की सुरक्षा भी जरूरी है। ड्यूटी के बाद घर में प्रवेश करने से पहले अच्छी तरह नहाते हैं और खुद ही कपड़े धोते हैं, ताकि संक्रमण से बचा जा सके। वे मार्च से आईसोलेशन वार्ड में मरीजों की देखरेख करने के साथ-साथ मरीजों को हौसलों की डोज भी दे रहे हैं।
पता नहीं चलता कब सैंपल लेना पड़ जाए, रहते हैं 24 घंटे तैयार : डॉ. मनोज
एलएनजेपी अस्पताल के दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज शर्मा की मार्च से ही कोरोना संक्रमित मरीजों के सैंपल लेने के लिए ड्यूटी लगाई गई है। डॉ. मनोज बताते हैं कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से संक्रमित मरीजों के सैंपल लेने में सतर्कता बरती जा रही है, यह पता नहीं लगता कि कब सैंपल लेना पड़ जाए। जैसे ही सूचना मिलती है तभी सैंपल लिया जाता है। बताया कि सैंपल लेते वक्त काफी सावधानी बरतनी पड़ती है, क्योंकि यह नहीं पता चलता कि कौन सा मरीज पॉजिटिव निकल जाए। उन्होंने संक्रमण से बचने के लिए खुद अपनी 56 वर्षीय माता, 10 वर्षीय बेटी और 8 वर्षीय बेटे से दूरी बनाई हुई है। उन्होंने दो बार खुद का भी कोविड-19 टेस्ट करवाया है।
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पीपीई किट पहने और उतरने में लगता है समय : डॉ. कृष्ण लाल
एलएनजेपी अस्पताल के फिजीशियन डॉ. कृष्ण लाल ने बताया कि मार्च के महीने से उनके साथ डॉ. गौरव, डॉ. अरविंद चहल, डॉ. दिनेश, डॉ. विक्रम और डॉ. मनोज लगातार कोरोना वॉर्ड में ड्यूटी कर रहे हैं। संक्रमण से बचने के लिए 6 से 8 घंटे तक पीपीई किट पहननी पड़ती है। पीपीई किट पहनने में 20 से 25 मिनट लगते है और इतना ही समय उतारने में। पीपीई पहनने के 15 मिनट तक सभी कपड़े पसीने से भीग जाते हैं। इस दौरान वह न तो पानी पी सकते हैं और न बाथरूम जा सकते हैं।
जागरूकता के साथ सावधानी जरूरी: डॉ. आशीष
फिजीशियन डॉ. आशीष अनेजा ने कहना है कि अगर कोरोना वायरस जैसी महामारी को मात देनी है तो जागरूकता और सावधानी बरतनी आवश्यक है, क्योंकि हमारी वजह से किसी को संक्रमण न हो जाए, इसीलिए वे खुद भी सावधानी बरत रहे हैं। घर पर जाते ही पहले नहाते हैं, फिर कपड़ों को गर्म पानी में धोकर दूसरे कपड़े पहनते हैं, ताकि संक्रमण से बचा जा सके।
संक्रमण कहां से फैला पता लगाना मुश्किल : डॉ. गौड़
दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. अंकित गौड़ का कहना है कि एक समय ऐसा था कि व्यक्ति को पता चल जाता था कि उक्त मरीज के संपर्क में आने से यह व्यक्ति संक्रमित हुआ है या फिर ट्रैवल हिस्ट्री से जानकारी मिल सकती थी, लेकिन बिना जागरूकता के सड़कों पर मास्क बिखरे पड़े है और कोई भी संक्रमित मरीज सार्वजनिक स्थान पर थूक देता है, जिसकी वजह से अब जूतों एवं कपड़ों द्वारा संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है। इसीलिए सावधानी बरते हुए जूतों को घर में प्रवेश करने से पहले एक कोनेे में निकले और नहाने के बाद दूसरे कपड़ों को पहनें। तभी कोरोना को मात दी जा सकती है।
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