कुरुक्षेत्र/शाहाबाद। वीरवार को मीरी-पीरी संस्थान के कार्यकारी समूह के चेयरमैन रघुजीत सिंह विर्क और वाइस चेयरमैन बलदेव सिंह कायम पुरी ने इस मामले में प्रेसवार्ता की। उन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा कमेटी के प्रधान जगदीश सिंह झिंडा और बलजीत सिंह दादूवाल सरकार के पिट्ठू बन गए हैं।
इन्हीं लोगों के कारण पिछले 10 वर्षों से एमबीबीएस मेडिकल कॉलेज का निर्माण अधर में लटका हुआ है। सैकड़ों छात्र चिकित्सक बनने से वंचित रह गए हैं।
उन्होंने बताया कि हरियाणा कमेटी का कुल बजट 104 करोड़ रुपये है, जबकि अकेले मीरी-पीरी संस्थान का वर्ष 2027-28 का बजट 130 करोड़ रुपये है। अगले वर्ष यहां मेडिकल कॉलेज शुरू होने वाला है जिसमें 100 सीटें मिल चुकी हैं।
साथ ही 400-450 बेड का अस्पताल बनेगा। एसजीपीसी प्रतिवर्ष 10 से 20 करोड़ रुपये संस्थान के लिए भेज रही है, जबकि संस्थान का मासिक खर्च चार से पांच करोड़ रुपये है।
इस विवाद पर छह दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाई है। 20 मार्च को हुई घटना के बाद दोनों पक्षों बलजीत सिंह दादूवाल और एसजीपीसी की ओर से तत्कालीन एसपी को शिकायत दी गई थी। अभी तक प्राथमिकी दर्ज नहीं हो पाई है। विर्क ने कहा कि जो भी कब्जा करना चाहता है, वह अदालत जाए लेकिन मेडिकल कॉलेज के निर्माण में अड़चन न डाले। हरियाणा कमेटी के सदस्य मोहनजीत सिंह ने कहा कि पराजित लोग माहौल खराब करने पर लगे हैं।
दादूवाल पंजाब के गुरदासपुर से आकर तानाशाही कर रहे हैं। सिख पंथक दल के प्रधान जगदेव सिंह गाबा ने मांग की कि दादूवाल की सुरक्षा तुरंत वापस ली जाए, क्योंकि वे पुलिस सुरक्षा की आड़ में गुंडागर्दी कर रहे हैं।