कुरुक्षेत्र। गीता ज्ञान के अवतरण की पवित्र भूमि पर बुधवार को पंजाबी धर्मशाला में दो दिवसीय संपूर्ण श्रीमद्भगवद्गीता पारायण यज्ञ का शुभारंभ हुआ। खास बात यह है कि इस यज्ञ में 50 देशों से आए अप्रवासी भारतीय एनआरआई शामिल हैं। यह एनआरआई ही यज्ञ में श्रीमद्भगवद्गीता के संपूर्ण 700 श्लोकों का संस्कृत भाषा में समवेत स्वर में पाठ कर रहे हैं।
इस गीता पाठ में अमेरिका, कनाडा, त्रिनिदाद, इंग्लैंड, जर्मनी, स्विटजरलैंड, यूएई, कुवैत, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड सहित 12 देशों से आए एनआरआई धर्मनगरी पहुंचे हैं। गीता परायण यज्ञ के पहले दिन राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने शिकरत की। इस गीता पाठ में विदेश से आए चार वर्ष से लेकर 83 वर्ष तक के लोग हिस्सा ले रहे हैं। इन अप्रवासी भारतीयों ने मात्र 10 महीनों में गीता के सभी श्लोकों को कंठस्थ किया है। इस गीता परायण यज्ञ का नेतृत्व विश्व विख्यात संत अवधूत गणपति सच्चिदानंद स्वामी कर रहे हैं।
मैसूर स्थित अवधूत दत्त पीठम् के पीठाधीश्वर गणपति सच्चिदानंद के 50 से अधिक देशों में भारतीयों समेत उन देशों के नागरिक अनुयायी हैं। ये लोग पहली बार कुरुक्षेत्र में आकर गीता परायण यज्ञ में शामिल हुए हैं। खास बात यह है कि इन अप्रवासी भारतीयों को हिंदी बोलना और लिखना नहीं आता है, मगर उन्होंने संस्कृत में गीता को कंठस्थ कर रखा है। उनके उच्चारण से कहीं नहीं लगता कि उनको हिंदी या संस्कृत का ज्ञान नहीं है। उनके स्पष्ट उच्चारण से यज्ञ में आए लोग भी अचंभित हो गए। हालांकि उन लोगों को तेलगू भाषा का भी बेहद अच्छा ज्ञान है।
पूरी गीता कंठस्थ : विष्णु
अमेरिका के टेक्सास से आए छह साल के विष्णु ने बताया कि उसे पूरी गीता के 700 श्लोक कंठस्थ है। उसके माता-पिता भी स्वामी सच्चिदानंद की संस्था से जुड़े है। वह पांच साल की उम्र में संस्था से जुड़ा था। एक साल की अथाह मेहनत के बाद उसे गीता के पूरे श्लोक याद हो गए। गीता श्लोक के लिए संस्था की ओर से हर वर्ष परीक्षा भी आयोजित कराई जाती है। परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले ही गीता समूह गान में हिस्सा लेते हैं।
आठ साल से कर रही गीता पाठ : प्रियांशी
अमेरिका से ही आई प्रियांशी ने बताया कि अभी वह 11 साल की है। वह आठ साल की उम्र में गीता पाठ का पाठ कर रही है। पांच साल की उम्र में उसने गीता पाठ का अध्ययन शुरू किया था। आज उसे गीता के सभी श्लोक क्रमवार स्मरण है।
शहीदी सभा में अभिभावक प्रतियोगिता के दौरान विजेता प्रतिभागी को सम्मानित करते गणमान्य। संवाद- फोटो : अंबाला दिल्ली नेशनल हाइवे स्थित निर्माणाधीन शहीदी स्माकर। संवाद