पुराने नोट बार-बार बदलवाने पर अंकुश लगाने के लिए इन लोगों की उंगली पर लगाई जाने वाली अमिट स्याही का ही अब बैंकों के समक्ष अड़ंगा अड़ गया है। स्याही की व्यवस्था ही नहीं हो पा रही है। सरकार के निर्णय व निर्देश आते ही बैंकों ने निर्वाचन कार्यालयों की ओर रुख कर लिया, लेकिन वह उस समय बैरंग लौटने को मजबूर होने लगे जब उन्हें यहां एक्सपायर हुई स्याही मिलने लगी।
बताया जा रहा है कि इन कार्यालयों में चुनाव के दौरान ही स्याही लाई गई थी और उस समय बची हुई स्याही है तो लेकिन अधिकतर कार्यालयों में रखी स्याही एक्सपायर हो चुकी है। ऐसे ही हालात कुरुक्षेत्र में भी मिले जबकि चुनाव कार्यालयों से जुड़े कर्मियों के मुताबिक सभी कार्यालयों में चुनाव के दौरान ही स्याही लाई गई थी और एक साथ ही उसकी एक्सपायर डेट थी। अब यह एक्सपायर हुई स्याही न तो चुनाव कार्यालयों से जुड़े अधिकारी ही इसे देने को तैयार है और न ही बैंक अधिकारी ही यह स्याही ले रहे हैं। माना जा रहा है कि एक्सपायर हुई स्याही उंगली पर लगाने से किसी भी व्यक्ति के लिए नुकसानदायक हो सकती है। इसी भय के चलते दोनों ओर से स्याही लेने व देने से इनकार किया जा रहा है।
एक्सपायर हो चुकी है स्याही : राजकुमार
निर्वाचन तहसीलदार राजकुमार का कहना है कि उनके पास कुछ स्याही अवश्य रखी है, लेकिन वह एक्सपायर हो चुकी है। उनके पास एसबीआई सहित कई निजी बैंक अधिकारी पहुंचे तो कई ने फोन पर भी संपर्क किया, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि स्याही एक्सपायर है और वह नहीं दी जा सकती। इस पर बैंक अधिकारी भी स्याही लेने से इनकार कर गए। इसके बावजूद उन्होंने अंबाला स्थित स्टोर से स्याही का पता करने की सलाह दी है, लेकिन वह भी राज्य निर्वाचन अधिकारी की इजाजत से ही मिल सकती है।
स्थायी मार्कर से चलाया जा रहा है कार्य : शर्मा
एसबीआई की पंचायत भवन में स्थित शाखा के मुख्य प्रबंधक दीपक शर्मा का कहना है कि वह भी स्याही लेने निर्वाचन कार्यालय गए थे, लेकिन एक्सपायर होने के चलते नहीं ली गई। इससे किसी भी व्यक्ति को कोई नुकसान हुआ तो बैंक जिम्मेदार होगा। ऐसे हालात में यह स्याही लगाने की बजाय परमानेंट मार्कर से ही काम चलाया जा रहा है।