कुरुक्षेत्र। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) में चल रही पांच दिवसीय आपदा जोखिम प्रबंधन विषय पर कार्यशाला का समापन शुक्रवार को हुआ। कार्यशाला में देशभर से आए 15 प्रदेशों के वैज्ञानिकों, अनुसंधानकर्ताओं और शोधार्थियों ने भाग लेकर आपदा जोखिम प्रबंधन पर अपने विचार साझा किए। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने देश की सामाजिक, वित्तीय, राजनीतिक एवं वैश्विक स्थिरता के लिए बुनियादी ढांचे को आपदाओं के प्रभाव से बचाने, समय रहते मानव जीवन को बचाने और उसे उपयोग करने के बारे में मंथन किया।
आधुनिक सिविल इंजीनियरिंग के तकनीकी ज्ञान, आईसीटी के प्रयोग, रेट्रोफिटिंग के उपयोग एवं उपयुक्त प्रबंधन से आम आदमी के जीवन को और अधिक सुरक्षित किया जा सकता हैं। यहीं नहीं डिसेबल रिस्क मैनेजमेंट एंड रिडक्शन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा भाैगोलिक सूचना प्रणाली के प्रयोग से प्राकृतिक आपदाओं का पूर्वानुमान लगाकर जन संपदा को अब बचाया जा सकता हैं। अब समय रहते ही भूकंप, बाढ़, सूखा, सुनामी और मानव जनित विस्फोटकों से बचा जा सकेगा। कार्यशाला में थॉपर यूनिवर्सिटी पटियाला के डॉ. नवीन कवात्रा ने विशिष्ट अतिथि के तौर पर आपदा जोखिम प्रबंधन पर अपने विचार साझा किए और प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए।
कार्यशाला के संयोजक प्रो. एचके शर्मा ने कहा कि आधुनिक शक्ति वाली कंक्रीट, फाइबर कंक्रीट, अल्ट्रा हाई परफॉरमेंस कंक्रीट का प्रयोग अब समय की मांग है जो हमें प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रखने में सहयोग करेगी। बताया कि टेक्नोलॉजी का प्रयोग, उचित मैटेरियल का चयन, आधुनिक कंप्यूटरीकृत संरचना ही अब भविष्य का आधार होगी। इस मौके पर प्रो. अरुण गोयल, प्रो. अश्वनी जैन, प्रो. पंकज मुंजाल, प्रो. जितेंद्र यादव, प्रेम कुमार सहित अन्य मौजूद रहे। संवाद