हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने आज एनआईटी कुरुक्षेत्र के 20वें दीक्षांत समारोह में पहुंचे उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और राज्यपाल प्रो. असीम घोष का हार्दिक स्वागत व अभिनंदन किया।
मुख्यमंत्री ने संबोधन में कहा कि एनआईटी कुरुक्षेत्र जैसे संस्थान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी तथा इंजीनियरिंग प्रतिभाओं को तैयार करने का प्रमुख केंद्र हैं। इस दीक्षांत समारोह में आने पर मुझे गर्व की अनुभूति हो रही है।”उन्होंने कहा कि यहां से निकले छात्र दुनिया के हर कोने में अपनी मेहनत और कौशल का डंका बजा रहे हैं और आगे भी बजाते रहेंगे।
तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा सरकार के कदमों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि 2014 से पहले राज्य में केवल 29 सरकारी तकनीकी शिक्षण संस्थान थे, अब इनकी संख्या बढ़कर 44 हो चुकी है। नायब सैनी ने कहा कि नई प्रौद्योगिकी के विकास और प्रसार में एनआईटी कुरुक्षेत्र जैसे संस्थान राज्य और देश को लगातार सहयोग दे रहे हैं। इस मौके पर उन्होंने सभी डिग्री प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को बधाई दी और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
तेजी से बदल रही दुनिया में पांच हजार साल से भी पहले भगवान श्रीकृष्ण द्वारा कुरुक्षेत्र की धरा पर दिया गया गीता का संदेश की सार्थकता और भी अधिक है। गीता की शास्वत प्रेरणा से हमें पूरी मानवता के कल्याण का संकल्प लेना चाहिए। यह आह्वान उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने किया।
वे आज यहां अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के अंतर्गत मल्टी आर्ट कल्चर सेंटर में आयोजित अखिल भारतीय देव स्थानम सम्मेलन में बतौर मुख्यातिथि पहुंचे। उन्होंने अपना पूरा संबोधन अंग्रेजी में ही दिया, जिसे कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की छात्रा द्वारा साथ ही हिंदी में अनुमोदित किया। सम्मेलन में मुख्यमंत्री नायब सैनी व देश के 64 देव स्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
इस दौरान उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत का संकल्प लिया है और इसे पूरा करने की राह भी गीता संदेश से निकलती है। गीता हमें सिखाती है कि सफलता से अंहकारी नहीं होना चाहिए और असफलता से कमजोर नहीं पड़ना चाहिए। गीता हमें जीवन जीना सिखाती है और यह कुरुक्षेत्र व हरियाणा ही नहीं पूरी मानवता के लिए शास्वत है। हमें अपने सांस्कृतिक से लेकर व्यक्तिगत कर्तव्यों में भी गीता को धारण करना चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने उस समय व हालात का भी जिक्र किया जब महाभारत युद्व के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के कुरुक्षेत्र की धरा पर गीता का अमर संदेश दिया था। उन्होंने कहा कि एक तरफ कोरवों की सेना थी तो दूसरी और पांडव खड़े थे। कम संख्या में होने के बावजूद पांडवों की जीत हुई, जो अधर्म पर धर्म की जीत थी। भगवान श्रीकृष्ण ने युद्व के हालात के बीच यही सार्थक संदेश देना था, जिसकी आज के समय में भी वैसी ही जरूरत है।
संतों ने ही संस्कृति के बीज बोए : मुख्यमंत्री
देव स्थानम सम्मेलन में मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा कि कोई भी देश अपनी संस्कृति के साथ ही आगे बढ़ सकता है। देव स्थानों से ही लोगों को जीवन जीने की राह मिलती है। ये स्थान हमारी संस्कृति के संवाहक है। इन्हीं स्थानों ने हमारे सांस्कृतिक मूल्यों को आगे बढ़ाया है। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में देव स्थानम सम्मेलन सांस्कृतिक यात्रा को और आगे बढ़ाने में कारगर साबित होगा। यह सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय गीता सम्मेलन की अहम कड़ी बन चुका है और यहां से निकलने वाला संदेश पूरी दुनिया में जाएगा।