कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में राज्य उच्च शिक्षा परिषद के सहयोग में एक दिवसीय संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें उच्च शिक्षा संस्थानों में कौशल आधारित पाठ्यक्रमों और माइक्रो-क्रेडेंशियल्स विषय पर मंथन किया गया। उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. कैलाश चंद्र शर्मा ने कहा कि एनईपी-2020 बहुविषयक शिक्षा को बढ़ावा देती है, जिसमें प्रवेश और निकास के कई विकल्प दिए जाते हैं। इससे शिक्षार्थियों को अपनी शैक्षणिक यात्रा में अधिक लचीलापन मिलता है। अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (एबीसी) के माध्यम से सुगम बनाया जाता है, जो शैक्षणिक उपलब्धियों के निर्बाध हस्तांतरण और मान्यता को सक्षम बनाता है। यह नीति उद्योगों के साथ सहयोग पर भी जोर देती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि छात्र रोजगार बाजार की बदलती मांगों के अनुरूप रोजगार योग्य कौशल विकसित करें।
उन्होंने कहा कि माइक्रो-क्रेडेंशियल कोर्स उच्च शिक्षा में सीखने को बढ़ाने के लिए एक लचीले और लक्षित तरीके के रूप में उभर रहे हैं। वे छात्रों को कम समय में विशिष्ट कौशल और दक्षता हासिल करने में सहायक हैं, जिससे शिक्षा अधिक सुलभ और उद्योग-प्रासंगिक हो जाती है। ये प्रमाणपत्र पारंपरिक डिग्री के पूरक हैं और उभरते हुए नौकरी बाजार में निरंतर सीखने में सक्षम बनाते हैं। एआईसीटीई के सदस्य सचिव प्रो. राजीव कुमार ने कहा कि उच्च शिक्षा का पारंपरिक मॉडल रहा, जिसमें कई वर्षों तक चलने वाली लंबी और महंगी डिग्री शामिल थी। माइक्रो-क्रेडेंशियल तथा स्किल बेस्ड कोर्स इस आवश्यकता का समाधान प्रदान करते हैं। इन कोर्सों को कम अवधि में हासिल किया जा सकता है।
कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में स्किल एनहांसमेंट कोर्स, वोकेशनल कोर्स, प्रोजेक्ट बेस्ड कोर्स, शाॅर्ट टर्म कोर्स व अन्य रोजगारपरक कोर्स चलाए जा रहे हैं। इनमें इंटर्नशिप का प्रावधान है। शोध, खेल, सांस्कृतिक व अन्य गतिविधियों में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने बेहतर प्रदर्शन किया है। आईआईएम नागपुर के निदेशक प्रो. भीमार्या मैत्री ने बताया कि एनईपी का उद्देश्य चरित्र निर्माण, रोजगारपरक शिक्षा तथा एसडीजी के 17 लक्ष्यों को प्राप्त करना है। व्यावसायिक शिक्षा और कौशल-आधारित शिक्षा पर जोर देती है।
विभिन्न सत्रों में इन वक्ताओं ने नई शिक्षा नीति पर किया मंथन
पहले सत्र में टीएन कौशल विकास निगम के उपाध्यक्ष रमेश वेंकट ने, दूसरे सत्र में सहायक निदेशक सुनील कुमार, तीसरे सत्र में अनुज गंगोला, चौथे सत्र में ओएसडी एवं पूर्व कुलपति डॉ. राज नेहरू ने राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क सभी प्रकार की शिक्षा-शैक्षणिक, व्यावसायिक और अनुभवात्मक- के क्रेडिटीकरण की सुविधा प्रदान करके पूर्व शिक्षा की मान्यता (आरपीएल) का समर्थन करता है। राज्य उच्च शिक्षा परिषद के एडवाइजर केके अग्निहोत्री ने भी अपने विचार साझा किए। इस मौके पर राज्य उच्च शिक्षा परिषद के उपाध्यक्ष प्रो. एसके गक्खड़, प्रो. आरएस राठौर, डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. दिनेश कुमार सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
शिक्षा डिग्री प्राप्त करने तक नहीं होनी चाहिए सीमित : महिपाल ढांडा
शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने कार्यशाला में संदेश भेजा और कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि युवाओं को जीवन में वास्तविक चुनौतियों के लिए तैयार करने का माध्यम होनी चाहिए। ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रतिस्पर्धात्मक दौर में ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।