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व्यक्तित्व विकास के लिए नीडोनॉमिक्स दृष्टिकोण जरूरी : प्रो. गोयल

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संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। आईक्यूएसी एवं विज्ञान विभाग शासकीय पीजी कॉलेज मुलताई (मध्यप्रदेश) द्वारा राष्ट्रीय शोध वेबिनार का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्यातिथि पूर्व कुलपति एवं नीडोनॉमिक्स स्कूल ऑफ थॉट के प्रवर्तक डॉ. मदन मोहन गोयल रहे। उन्होंने व्यक्तित्व विकास एवं चरित्र निर्माण हेतु नीडोनॉमिक्स की नीडो-शिक्षा विषय पर अपने विचार साझा किए। कॉलेज की प्राचार्य डॉ. वर्षा खुराना और संगठन सचिव डॉ. नरेंद्र कुमार ने प्रोफेसर एमएम गोयल की उपलब्धियों के बारे में प्रतिभागियों को जानकारी दी।
प्रो. गोयल ने बताया कि संतुलित व्यक्तित्व एवं मजबूत चरित्र के विकास हेतु नैतिक दृष्टिकोण के साथ नीडोनॉमिक्स का परिवर्तनकारी दृष्टिकोण अपनाएं। ये शब्द पूर्व कुलपति एवं नीडोनॉमिक्स स्कूल ऑफ थॉट के प्रवर्तक डॉ. मदन मोहन गोयल, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त अर्थशास्त्र के प्रोफेसर ने कहे। वास्तविक जरूरतों पर ध्यान केंद्रित करके और ज़रूरत-खपत को सचेत और नैतिक रूप से बढ़ावा देकर ही हम आत्म-अनुशासन, सहानुभूति, अखंडता और विनम्रता जैसे गुणों को विकसित कर सकते हैं। मूल्यों और नैतिक सिद्धांतों को स्थापित करके चरित्र निर्माण को बढ़ावा देने की प्रक्रिया को गीता-आधारित नीडोनॉमिक्स द्वारा बेहतर ढंग से निर्देशित किया जा सकता है।
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नीडो- उपभोग के स्तर में असमानताओं के साथ अन्याय से बचें। क्योंकि नीडो-जीवनशैली नीडोनॉमिक्स के क्षेत्र में आती है। सामान्य ज्ञान दृष्टिकोण के रूप में नीडोनॉमिक्स की शिक्षा व्यक्तित्व विकास के लिए एक आवश्यक और पर्याप्त शर्त है। व्यक्तित्व विकास की एक नई कहानी लिखने हेतु हमें स्ट्रीट स्मार्ट, वैश्विक नागरिक बनने के लिए साहसी और उत्साही होना चाहिए।
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