कुरुक्षेत्र। जय ओंकार आश्रम में प्रवचनों का आनंद लेते श्रद्धालु। स्वयं
कुरुक्षेत्र। अमीन रोड स्थित जय ओंकार आश्रम में अंतरराष्ट्रीय सेवाश्रम संघ संस्थापक स्वामी शक्तिदेव और स्वामी संतोष ओंकार ने रविवार को प्रवचन किए। उन्होंने संगत को प्रेरणा दी कि प्रत्येक शिष्य को हमेशा सद्गुरु के सान्निध्य में जीवन यापन करना चाहिए।
इंसान के जीवन में चुनौतियां आएं तो डगमगाने की बजाय संभलते हुए दूसरों से वैर भाव के डटकर परिस्थितियों का सामना करें।
अपमान, शोक, वियोग, हानि, असफलता आदि तमाम स्थितियां आती रहती हैं और फिर चली भी जाती हैं। दुनिया का कोई भी शरीरधारी जीव इन विविधताओं से बच नहीं पाता।
उन्होंने कहा कि जरा-सी बात पर परेशान हो जाना, निराश हो जाना, रोना, उत्तेजित हो जाना, क्रोध में आकर अयोग्य बात या अपशब्द कह जाना, गलत काम कर जाना, यह सब मनुष्य की आंतरिक कमजोरी, दुर्बलता, जड़ता के लक्षण हैं।
इसलिए मानसिक बल को बढ़ाने की आवश्यकता है। कठिन से कठिन विकट स्थिति में विवेक एवं धैर्य से निर्णय लें। संवाद