कुरुक्षेत्र। प्राकृतिक खेती ही भविष्य की सुरक्षित खेती है, जिससे न केवल स्वास्थ्य सुधरेगा, बल्कि मिट्टी और पर्यावरण भी संरक्षित रहेंगे। प्राकृतिक कृषि प्रशिक्षण संस्थान में एग्रीकल्चर सुपरवाइजर के लिए आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन पर कृषि उपनिदेशक डॉ. कर्मचंद ने बतौर मुख्यातिथि ये विचार व्यक्त किए। उन्होंने जहर मुक्त खेती के महत्व एवं उसके तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की तथा उपस्थित प्रशिक्षकों को प्रमाणपत्र वितरित किए।
डॉ. कर्मचंद ने प्रशिक्षकों से आह्वान किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में अधिक से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ें और उन्हें इस पद्धति की तकनीकी जानकारी दें, ताकि राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन को सफलतापूर्वक क्रियान्वित किया जा सके। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान की संयोजक डॉ. मनीषा ने की। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र से डॉ. सरिता तथा अन्य प्रशिक्षक डॉ. प्रदीप एवं डॉ. रोशन भी उपस्थित रहे। संस्थान द्वारा आगामी तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन 14 से 16 जुलाई तक कुरुक्षेत्र, करनाल एवं पानीपत जिलों के किसानों के लिए किया जाएगा।