कुरुक्षेत्र। एनआईटी में आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते मुख्यातिथि डॉ. अतुल कोठारी। संवाद
कुरुक्षेत्र। नई शिक्षा नीति (एनईपी) की आत्मा भारतीय ज्ञान परंपरा है। कई राज्यों में राजनीति के कारण एनईपी लागू करने में देरी हो रही है, लेकिन इसे पूरी तरह लागू करना होगा। एनईपी लागू करना कोई छोटा-मोटा सुधार नहीं, बल्कि शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव किया जा सकता है। 2035 तक यह पूर्णत: लागू होगी।
ये विचार राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) कुरुक्षेत्र में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान विशेष बातचीत में मुख्य अतिथि शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास नई दिल्ली के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी ने व्यक्त किए। यह कार्यशाला शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास हरियाणा प्रांत के संयुक्त सहयोग में ‘व्यक्तित्व का समग्र विकास एवं चरित्र निर्माण : राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020’ विषय पर आयोजित की गई थी। जिसमें कई विषय विशेषज्ञों ने मंथन किया।
डॉ. कोठारी ने बताया कि यदि शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की ओर से तैयार किए गए पाठ्यक्रम को अपनाया जाए तो करीब 70 प्रतिशत एनईपी स्वतः लागू हो जाएगी। गायत्री की पंचकोशी अवधारणा अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय और आनंदमय कोश व्यक्तित्व के समग्र विकास और चरित्र निर्माण का आधार है। यदि इन पांचों स्तरों का संतुलित विकास हो तो ही वास्तविक शिक्षा संभव है। उन्होंने बताया कि एनईपी के तहत प्रोफेशनल शिक्षा स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध कराई जाएगी।