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विकसित भारत 2047 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति की अहम भूमिका : प्रो. अनीता दुआ

Tue, 03 Feb 2026 02:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
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कुरुक्षेत्र। गोष्ठी में हिस्सा लेते मुख्याति​थि सहित अन्य सदस्य। स्वयं - फोटो : बाराबंकी रेलवे स्टेशन पर एक साथ आई तीन ट्रेनें।
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ टीचर्स ट्रेनिंग एंड रिसर्च (आईटीटीआर) और पंचनद अध्ययन केंद्र कुरुक्षेत्र के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को विकसित भारत 2047 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति का योगदान विषय पर एक विचारोत्तेजक गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में शिक्षा नीति की भूमिका, उसके व्यावहारिक पक्ष और युवाओं के भविष्य पर इसके प्रभाव पर विस्तार से चर्चा की गई।
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मुख्य वक्ता आईटीटीआर की प्राचार्या प्रो. अनीता दुआ ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के उन प्रमुख पहलुओं पर प्रकाश डाला, जो विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को शीघ्र प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि एनईपी में ऐसे कई अनिवार्य तत्व शामिल हैं, जो युवाओं को स्वरोजगार और औद्योगिक प्रशिक्षण से जोड़ते हैं। कौशल आधारित शिक्षा, बहुविषयक अध्ययन और व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से विद्यार्थी पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने विषय से जुड़े स्वरोजगार के अवसर स्वयं सृजित करने में सक्षम बनेंगे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के निदेशक प्रो. सुनील ढींगरा ने की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को केवल अकादमिक जगत ही नहीं बल्कि समाज के आम व्यक्ति को भी समझने की आवश्यकता है। एनईपी शैक्षणिक संस्थानों और उद्योगों के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करती है।
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पंचनद अध्ययन केंद्र के अध्यक्ष डॉ. कंवरदीप शर्मा ने कहा कि किसी भी देश को विकसित बनाने में शिक्षा मॉडल की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। शिक्षा का सही ढांचा राष्ट्र के सामाजिक और आर्थिक विकास को नई दिशा देता है। इस मौके पर पंचनद शोध अध्ययन केंद्र के शोध समन्वयक प्रो. संजीव अरोड़ा, उपाध्यक्ष डॉ. कांता, उपाध्यक्ष डॉ. राम अवतार, सहसचिव डॉ. राजकमल, सचिव राजेश सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।

कुरुक्षेत्र। गोष्ठी में हिस्सा लेते मुख्यातिथि सहित अन्य सदस्य। स्वयं- फोटो : बाराबंकी रेलवे स्टेशन पर एक साथ आई तीन ट्रेनें।

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