राज्यपाल प्रोफेसर कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि विश्व में केवल भारत ही एक ऐसा राष्ट्र है, जिसकी सांस्कृतिक राष्ट्र के रुप में अपनी खास पहचान हैं। इस पावन भूमि का उद्देश्य राजनीति करना नहीं है। यह भूमि संतों, ऋषिमुनियों के तप की भूमि है, इसलिए पूरी दुनिया में भारत की संस्कृति सबसे महान है। इस देश की संस्कृति जीवन जीने की कला और पद्धति सिखाती है और इस पावन धरा पर ही नर के रुप में पैदा होकर नारायण बन सकता है। वे मंगलवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सीनेट हाल में हरियाणा इतिहास एवं संस्कृति अकादमी की ओर से युग-युगों से हरियाणा, इतिहास, समाज, संस्कृति और अर्थव्यवस्था विषय पर आयोजित हरियाणा स्वर्ण जयंती राष्ट्रीय सम्मेलन एवं प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के उपरांत बोल रहे थे।
इससे पहले राज्यपाल प्रोफेसर कप्तान सिंह सोलंकी, नई दिल्ली इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टोरिकल रिसर्च के चेयरमैन वाई सुदर्शन राव, नेहरू मेमोरियल म्यूजियम और लाइब्रेरी नई दिल्ली के निदेशक शक्ति सिन्हा, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर कैलाश चंद्र शर्मा, भारतीय इतिहास संकलन योजना नई दिल्ली के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रोफेसर एससी मित्तल ने दीप प्रज्ज्वलित कर विधिवत रुप से राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ किया और प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।
राज्यपाल ने आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि स्वर्ण जयंती वर्ष में राष्ट्रीय सम्मेलन एवं प्रदर्शनी मील का पत्थर साबित होगी। इस प्रदर्शनी के जरिये युवा पीढ़ी को प्रदेश के इतिहास को जानने का सुनहरा अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि पूरे विश्व में किसी न किसी राष्ट्र की स्थापना के पीछे किसी न किसी राजा का नाम जुड़ा है, लेकिन भारत ही एक ऐसा राष्ट्र है जिसका किसी को मालूम नहीं कि इस देश का इतिहास कितना पुराना है और इस राष्ट्र की उत्पत्ति में किस राजा का नाम है।
गीता के श्लोकों में जीवन जीने के सिद्धांत
केयू के कुलपति प्रोफेसर कैलाश चंद्र शर्मा ने कहा कि गीता के श्लोकों में जीवन जीने के सिद्धांतों का विस्तार से उल्लेख किया गया है। इस धरा पर जहां भगवान श्रीकृष्ण ने पूरे विश्व को गीता का संदेश दिया, वहीं सरस्वती नदी के किनारे बसने वाले हरियाणा की कोख में ही प्राचीन सभ्यताओं और संस्कृति ने जन्म लिया। बेशक विदेशियों ने इसी धरा की तरफ सबसे पहले आक्रमण किए, लेकिन इसके संघर्षशील इतिहास और संस्कृति को कोई मिटा नहीं पाया। हरियाणा इतिहास एवं संस्कृति अकादमी के निदेशक प्रोफेसर रघुवेन्द्र तंवर ने कहा कि 10 सालों से अकादमी विभिन्न प्रोजेक्ट पर कार्य कर रही है। कार्यक्रम के अंत में महामंत्री कुलदीप, डा. कौशिक, विशा प्रभा, डा. खुराना और डा. जुनेजा ने मेहमानों को पुस्तकें भेंट की। मौके पर उपायुक्त सुमेधा कटारिया, पुलिस अधीक्षक अभिषेक गर्ग, एडीसी धर्मवीर सिंह, एसडीएम नरेंद्र पाल मलिक, सतीश मित्तल, रजिस्ट्रार डा. प्रवीण सैनी सहित विभाग के अधिकारी, विश्वविद्यालय के शिक्षक और गणमान्य लोग मौजूद थे।
मिस्र से दो हजार साल पुरानी सभ्यता हरियाणा में रही
भारतीय इतिहास संकलन योजना नई दिल्ली के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रोफेसर एससी मित्तल ने कहा कि मई 2016 में हरियाणा की धरा राखीगढ़ी की खुदाई से मिले साक्ष्यों के अनुसार यह सिद्ध हो चुका है कि मिस्त्र से भी 2 हजार वर्ष पुरानी सभ्यता हरियाणा में रही। हरियाणा ही नहीं भारत के हर कोने ने किसी न किसी रुप में अपना योगदान दिया है। इस भूमि की शक्ति, संघर्ष, संस्कृति, धर्म, आर्थिक और सादगी की दृष्टि से अपनी एक अलग पहचान है।
दुनिया नतमस्तक है इस दुनिया को
नई दिल्ली इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टोरीकल रिसर्च के चेयरमैन वाई सुदर्शन राव ने कहा कि कुरुक्षेत्र की पावन भूमि पर ही धर्म की विजय हुई इसलिए मानवता के लिए इस भूमि का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। इस भूमि के अलावा पानीपत में भी 3 लड़ाइयां लड़ी गई, लेकिन महाभारत का युद्ध धर्म और अधर्म को लेकर हुुआ, इसलिए इस भूमि को पूरी दुनिया नतमस्तक करती है। नेहरू मेमोरियल म्यूजियम और लाइब्रेरी नई दिल्ली के निदेशक शक्ति सिन्हा ने कहा कि हरियाणा के गांव-गांव में वीर सैनिकों ने जन्म लिया और इस भूमि के इतिहास और परंपरा को बनाए रखा।
अकादमी करेगी मंगलसेन के इतिहास पर लेख सामग्री का प्रकाशन
हरियाणा इतिहास एवं संस्कृति अकादमी के निदेशक डा. राघवेंद्र तंवर ने कहा कि अकादमी शीघ्र ही सर छोटू राम और मंगल सेन के इतिहास पर लेख सामग्री का प्रकाशन करेगी और अकादमी की तरफ से एक शोध पत्रिका भी जारी की जाएगी। आने वाले 7-8 माह में देश के बंटवारे के समय में हरियाणा की भूमिका पर प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा और हरियाणा के 200 साल के सैनिक इतिहास को भी सबके समक्ष रखा जाएगा। इस राष्ट्रीय सम्मेलन में करीब 70 शोधपत्र पढ़े जाएंगे।