कुरुक्षेत्र। नाटक नंदू नचैया का मंचन करते कलाकार। आयोजक
कुरुक्षेत्र। हरियाणा कला परिषद और उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज ने पांच दिवसीय पंचजन्य नाट्य समारोह आयोजित किया। इसके दूसरे दिन नंदू नचैया नाटक का प्रभावशाली मंचन हुआ। इस नाटक ने बुंदेली लोक संस्कृति और राई कला के रंगों से दर्शकों को भाव विभोर कर दिया।
यह नाटक बुंदेली लोक नृत्य व नाट्य कला परिषद, सागर के रंगकर्मियों ने प्रस्तुत किया। विजय सोनवाने द्वारा लिखित और संतोष रामसहाय पांडे द्वारा निर्देशित यह नाटक राई लोक कला पर केंद्रित है। मुख्य पात्र नंदू अपनी पारंपरिक राई नृत्य विधा को अपनी आजीविका और आत्मा मानता है। नाटक आधुनिक युग में लोक कलाओं के प्रति बदलते सामाजिक नजरिए को दर्शाता है। कलाकारों को मंच पर सराहना मिलती है, पर मंच के पीछे वे आर्थिक तंगी और सामाजिक उपेक्षा झेलते हैं। नाट्य संध्या में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुलसचिव वीरेंद्र पाल मुख्य अतिथि थे। संगीत मर्मज्ञ शुचिस्मिता शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।
नंदू और रूपा का संघर्ष
कहानी में राई कलाकार नंदू से ठाकुर की बहन रूपा प्रेम करती है। निम्न वर्ग का होने के कारण ठाकुर उसे अपनाने से मना करता है। परिवार के विरोध के बावजूद रूपा नंदू से विवाह कर लेती है। बाद में उच्च वर्ग के लोग नंदू को मार डालते हैं। रूपा अपने बेटे को राई कलाकार बनाने का निश्चय करती है, जिससे यह परंपरा जीवित रहती है।
नाटक वीर चंद्र सिंह गढ़वाली का मंचन आज
पंचजन्य नाट्य समारोह के समापन अवसर पर आज ललित सिंह पोखरिया का लिखा और अनुराग वर्मा के निर्देशन में नाटक वीर चंद्र सिंह गढ़वाली मंचित किया जाएगा। कार्यक्रम का समय शाम छह बजे रहेगा।
कुरुक्षेत्र। नाटक नंदू नचैया का मंचन करते कलाकार। आयोजक