कुरुक्षेत्र। हरियाणा कला परिषद की ओर से हर सप्ताह आयोजित होने वाली साप्ताहिक संध्या में शुक्रवार को डाॅ. सतीश कश्यप के निर्देशन में हरियाणवी लोकनाट्य स्वांग दम मस्त कबीरा का मंचन किया गया। अपनी एक अलग शैली में प्रस्तुत स्वांग ने दो घंटे तक कलाकारों को कबीर के जीवन के हर रंग से अवगत कराया। इस अवसर पर वरिष्ठ रंगकर्मी बृज शर्मा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।
कबीर की वाणी से प्रारंभ हुए स्वांग दम मस्त कबीरा में हिसार से आए डॉ. सतीश कश्यप व अन्य कलाकारों ने भक्ति रस बहा दिया। संवाद, संगीत, अभिनय और रोचकता का ऐसा अनूठा संगम देखने को मिला कि सभागार में उपस्थित एक भी दर्शक स्वयं को कबीर से जोड़े बिना नहीं रह पाया।
स्वांग में कबीर के जन्म से कहानी को प्रारंभ किया गया, जिसमें सुनाया कि कबीर का जन्म एक हिंदू परिवार में हुआ लेकिन उसका पालन-पोषण एक मुस्लिम परिवार द्वारा किया गया। कबीर के बड़े होते ही कबीर को हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों की प्रताड़ना सहनी पड़ी। धीरे-धीरे कबीर अध्यात्म की ओर बढ़ गया। कबीर जब गुरु रामानंद की शरण में आए तो उनका व्यक्तित्व भी दिव्य हो गया। केवल प्रभू का सिमरन करने से ही कबीर लोगों की मुसीबतें हल करने लगे। इससे उनके आस-पास के लोगों को कबीर से ईर्ष्या होने लगी और उन्होंने सुल्तान लोधी के आगे कबीर को दंडित करने की गुहार लगाई। सुल्तान ने भी कबीर को यमुना में डूबोने का हुकम दे दिया। लेकिन कबीर के ईश्वर प्रेम और प्रभु में आस्था होने के कारण सुल्तान के सैनिक कबीर का कुछ न बिगाड़ सके। इससें सुल्तान की भी कबीर के प्रति आस्था बढ़ गई। लेकिन कबीर की मुश्किलें समाप्त नहीं हुई। कबीर के विरोधी कबीर के जीवन को समाप्त करने के लिए हर सम्भव प्रयास करते रहे। अंत में कबीर ने जब जीवन को त्यागा तो उनके अनुयायियों ने उनके मृत शरीर के स्थान पर पुष्प पाए, जिससे कबीर सदा-सदा के लिए अमर हो गया। इस दौरान हरियाणा कला परिषद के कार्यालय प्रभारी धर्मपाल गुगलानी ,शिवकुमार किरमिच, दीपक शर्मा, रमेश सुखीजा आदि भी उपस्थित रहे।