कुरुक्षेत्र। विकासशील देशों की अनुसंधान एवं सूचना प्रणाली (आरआइएस) द्वारा तीन व चार जून को नई दिल्ली में वैश्विक दक्षिण एवं त्रिकोणीय सहयोग के उभरते पहलुओं विषय पर आयोजित किया गया। उद्घाटन सत्र में विभिन्न विश्वविद्यालयों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर भी किए गए। इसी कड़ी में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय तथा विकासशील देशों की अनुसंधान एवं सूचना प्रणाली (आरआइएस) के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।
कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय और आरआइएस का संबंध 1990 के दशक से चला आ रहा है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (2020) को पूर्णत: लागू करने में अग्रणी भूमिका निभाई है और यह देश का पहला विश्वविद्यालय है, जिसने इसे पूर्ण रूप से कार्यान्वित किया है। विश्वविद्यालय के शिक्षक गण तेजी से पेटेंट पंजीकरण की दिशा में कार्य कर रहे हैं। कुवि आने वाले समय में आरआइएस के साथ संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं, विद्यार्थियों की इंटर्नशिप, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन एवं कार्यशालाओं का आयोजन करेगा और शीघ्र ही भारतीय महासागर क्षेत्रीय संगठन (आईओआरए) की विश्वविद्यालय नेटवर्क (यूएमआईओआर) का सदस्य बनने की प्रक्रिया में है।
उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन वैश्विक दक्षिण के देशों के बीच सहयोग, सशक्त भागीदारी और साझा विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसमें भारतीय शैक्षणिक संस्थानों की सक्रिय भागीदारी इस प्रयास को नई दिशा देने में सहायक सिद्ध हो रही है। वर्ष 2023 में भारत की जी-20 की अध्यक्षता के दौरान विदेश नीति के तहत आयोजित यूनिवर्सिटी कनेक्ट हब प्रोग्राम में देशभर से 100 विश्वविद्यालयों ने सहभागिता की थी। इस कार्यक्रम के अंतर्गत विदेश नीति से संबंधित अनेक चर्चाओं और सेमीनारों का आयोजन किया गया। उक्त कार्यक्रम की उपलब्धियों को आगे बढ़ाते हुए आरआइएस ने 21 प्रमुख विश्वविद्यालयों का चयन कर उनके साथ सहभागिता हेतु समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस प्रोग्राम के दौरान प्रमुख रूप से पराग्वे के राष्ट्रपति सैंटियागो पेना पालासियस, विदेश मंत्री पबित्रा मारग्रेटा, आरआइएस अध्यक्ष संजय कुमार वर्मा, कुलसचिव डॉ. वीरेंद्र पॉल सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे