हरियाणा की सांस्कृतिक विरासत को संजोकर रखने वाले अंतरराष्ट्रीय सारंगी वादक मोमन खान की उंगलियों और तारों के संगम से निकली धुनों के कद्रदान हरियाणा ही नहीं 10 से ज्यादा देशों के लाखों लोग हैं। इस वाद्य यंत्र को बजाकर हरियाणावी संस्कृति को दूर-दूर तक पहुंचाने वाले मोमन खान को राष्ट्रपति अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। इस वाद्य यंत्र की आवाज को वह बुलंद रखना चाहते हैं।
वे सोमवार को कला एवं सांस्कृतिक विभाग हरियाणा की तरफ से आयोजित 7 दिवसीय संगीत एवं नृत्य कार्यशाला में पहुंचे। पानीपत घराना से संबंध रखने वाले मोमन खान की 7 पुश्तें सारंगी विधा को बचाकर हरियाणा की सांस्कृतिक विरासत को संजोने में अपनी अहम भूमिका निभा रही है। 9 साल की उम्र में एक छोटी सी सारंगी को हाथों में थामने वाले मोमन खान को शायद यह एहसास नहीं था कि उनकी सारंगी से निकली धुने पूरे विश्व में अपनी महक छोड़ेंगी और इस महक के लाखों लोग कद्रदान होंगे।
उन्होंने कहा कि हरियाणा में अब इक्का-दुक्का लोग ही सारंगी बजाते हैं। खानदानी पेशा होने के कारण 72 वर्ष की उम्र भी सारंगी से मोह नहीं छूटा, इसलिए इस परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा लोक कलाकारों को प्रोत्साहित करने, मंच मुहैया करवाने और अनेक प्रकार की सुविधाएं मुहैया करवाने पर आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाओं से हरियाणा की लोक विधाओं को जीवित रखा जा सकता है। सही मायने में इस प्रकार की विधाएं ही हरियाणा की धरोहर है। उन्होंने एक प्रश्र का जवाब देते हुए कहा कि हरियाणा के साथ-साथ दूसरे देशों लीबिया, सीरिया, मोराक्को, दुबई, मिस्त्र, नेपाल सहित कई अन्य देशों में विशेष आमंत्रण पर गए।