धान खरीद को लेकर पहले आढ़तियों के निशाने पर आई प्रदेश सरकार अब नमी की मात्रा बढ़ाने को लेकर आदेश जारी कर फिर घिर गई है। नई पॉलिसी अपनाने से प्रदेश भर के राइस मिलर्स ने स्पष्ट इनकार कर दिया है। इसको लेकर पिपली पैराकिट में खाद्य एवं पूर्ति विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव एसएस प्रसाद व महानिदेशक संजय जून के साथ तीन घंटे चली बैठक बेनतीजा रही। अब मिलर्स की शनिवार को चंडीगढ़ में प्रदेश के कृषि मंत्री ओपी धनखड़ व खाद्य एवं पूर्ति मंत्री कर्ण देव कंबोज के साथ बैठक होगी।
पहले प्रदेश सरकार ने 17 फीसदी नमी वाला धान सरकारी रेट पर खरीद करने का निर्णय लिया था, लेकिन प्रदेश भर की मंडियों में 17 फीसदी माश्चर का धान न के बराबर ही अब तक आया है तो वहीं किसानों की ओर से आरोप लगाए जाते रहे कि नमी अधिक बता व्यापारी व खरीद एजेंसी धान खरीद नहीं कर रहे हैं। सूखे धान में अधिक नमी की आड़ में उन्हें पूरा रेट नहीं दिया जा रहा है। मांग की जाती रही कि मौसम के अनुसार धान में माश्चर की मात्रा 17 फीसदी से अधिक ही रहने की संभावना है। इसके चलते इस मात्रा को बढ़ाया जाए। वहीं इनेलो भी इस मांग को लेकर मंडियों व सड़कों पर उतरा हुआ था। अब बुधवार को ही प्रदेश सरकार ने नमी मात्रा 22 फीसदी तक किए जाने का निर्णय लिया था कि वीरवार को इस संबंध में प्रदेश के सभी खाद्य एवं पूर्ति अधिकारियों को यह आदेश जारी कर दिए। इससे राइस मिलर्स ने स्वीकार करने से स्पष्ट इनकार कर दिया।
इसी के चलते ही जिले की अनाज मंडियों में शुक्रवार को धान खरीद नहीं हुई। इस बाबत हरियाणा राइस मिलर्स व डीलर्स की एक बैठक भी कुरुक्षेत्र के एक निजी होटल में हुई। इसमें इस नीति पर व्यापक विचार किया गया। इसके बाद पिपली पैराकीट में विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव व महानिदेशक ने कुरुक्षेत्र, करनाल व कैथल सहित कई अन्य जिलों के राइस मिलर्स के साथ बैठक की। इसमें हरियाणा प्रदेश राइस मिलर्स एवं डीलर्स के प्रदेशाध्यक्ष हंसराज सिंगला, उपप्रधान दमन सिंह, ज्वैल सिंगला, अमन लाडवा व शीशपाल जिंदल सहित दर्जनों मिलर्स शामिल रहे। हालांकि अधिकारियों ने उन्हें मनाने के भरसक प्रयास किए,लेकिन उन्हें यह पॉलिसी मानने से स्पष्ट इनकार कर दिया। तीन घंटे तक चली जद्दोजहद केे बाद कोई नतीजा नहीं निकला तो मामले से कृषि एवं खाद्य मंत्रियों को अवगत करवाया गया। इसके बाद ही शनिवार को मिलर्स के शिष्टमंडल को चंडीगढ़ बुलाया गया।
ये है नए आदेश
सरकार की ओर से जारी किए गए नए आदेशों में अब हर क्विंटल पर वजन कटौती करनी होगी। 17 फीसदी नमी से लेकर अब 22 फीसदी तक नमी के अनुसार वजन कटौती करनी होगी। निर्धारित 17 फीसदी से एक फीसदी अधिक नमी होने पर वजन में एक फीसदी कमी मानी जाएगी। 19 फीसदी पर 2 फीसदी और इसी प्रकार आगे यह कटौती आगे बढ़ती जाएगी। किसानों को इस कटौती के अनुसार ही धान की कीमत चुकाई जाएगी। लेकिन राइस मिलर्स से सीएमआर चावल की वसूली रिड्यूस वजन अनुसार की जाएगी।
पहली पॉलिसी स्वीकार नई नहीं : हंसराज
हरियाणा प्रदेश राइस मिलर्स व डीलर्स के प्रदेशाध्यक्ष हंस राज सिंगला ने बाद में अमर उजाला को बताया कि यह नीति किसी भी रूप में स्वीकार नही है। इस नीति को अमल में लाने के लिए प्रशासन के पास भी पर्याप्त संसाधन नहीं है तो इसे किसान भी स्वीकार नहीं करेंगे। यह नीति वास्तविक रूप से लागू नहीं हो सकती। इससे मिलर्स को बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अभी एसोसिएशन ने हड़ताल का निर्णय नहीं लिया है और शनिवार को होने वाली बैठक में कोई निर्णय आने की उम्मीद है।