फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हरियाणा के गुरुद्वारा साहिबान की आमदन 44 करोड़ बताकर विर्क कर रहे भ्रमित : अजराना

विज्ञापन
विज्ञापन
अपने साथ हरियाणा की सिख संगत होने का दावा करने वाले एसजीपीसी के सदस्य एवं पदाधिकारी हरियाणा में चुनाव लड़कर देख लें, उनका सारा भ्रम दूर हो जाएगा। यह कहना है एचएसजीपीसी के पूर्व युवा प्रदेश अध्यक्ष एवं शिरोमणि अकाली दल हरियाणा स्टेट के वरिष्ठ नेता कवलजीत सिंह अजराना का। वे सोमवार को गुरुद्वारा साहिब पातशाही छठी में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उनसे करीब दो घंटे पहले ही गुरुद्वारा के साथ ही स्थित सिख मिशन कार्यालय में एसजीपीसी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रघुजीत सिंह विर्क व सदस्य हरभजन सिंह मसाना तथा बलदेव सिंह कैमपुरा ने भी पत्रकारवार्ता की थी। उसके जवाब में अजराना ने कहा कि एसजीपीसी के वरिष्ठ उप प्रधान रघुजीत सिंह विर्क हरियाणा के गुरुद्वारा साहिबान की आमदन मात्र 44 करोड़ रुपये बताकर भ्रमित कर रहे हैं।
विज्ञापन

अजराना ने कहा कि हरियाणा में करीब छह हजार एकड़ जमीन गुरुद्वारा साहिबान के नाम है। इसके अलावा विभिन्न शिक्षण संस्थान, ट्रस्ट और गुरुद्वारा साहिबान हैं, जहां से करीब 400 करोड़ रुपये सालाना आमदन होती है। यदि मात्र 44 करोड़ रुपये आमदन हो, तो खर्च चलाना ही मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में एसजीपीसी को चाहिए कि वे घाटे का सौदा छोड़ कर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार हरियाणा के गुरुद्वारा साहिबान अलग कमेटी के हवाले कर दे। अजराना ने कहा कि एसजीपीसी के प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी और अन्य हरियाणा कमेटी के गठन पर सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन डालने की बात कर रहे हैं, जबकि आठ साल पहले भी उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का द्वार खटखटाया था और संगत से चढ़ावे के रूप में आए करोड़ों रुपये वकीलों पर खर्च करके अपनी पैरवी करवाई। इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने एचएसजीपीसी के हक में फैसला दिया है। अजराना ने बताया कि सिर्फ एसजीपीसी को छोड़ कर किसी भी सिख संस्था ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर एतराज नहीं जताया है, इसलिए एसजीपीसी भी अपना हठ छोड़ कर हरियाणा के गुरुद्वारा साहिबान की सेवा संभाल यहां की संगत के हवाले कर दे।
एसजीपीसी के सदस्य एवं शिरोमणि अकाली दल हरियाणा स्टेट के वरिष्ठ नेता जत्थेदार भूपिंदर सिंह असंध ने कहा कि एसजीपीसी के अधिकांश सदस्य भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पक्ष में हैं। शायद यही कारण है कि एसजीपीसी द्वारा बुलाए गए इजलास में मात्र 65 सदस्य शामिल हुए। उनमें से भी मेंबर किरनजोत कौर सहित कुछ अन्य सदस्यों ने एसजीपीसी के प्रस्तावों पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने बताया कि वर्ष 1966 में हरियाणा का गठन भी अकालियों के गलत निर्णय के कारण हुआ था। स्वार्थ के चलते अकालियों ने महा पंजाब में से हरियाणा का अलग होना स्वीकार किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें