केयू के ऑडिटोरियम में भूजल के संरक्षण पर मंथन के दौरान केंद्रीय मंत्री उमा भारती के सामने राज्य कृषि मंत्री ओपी धनखड़ ने प्रदेश में पानी की किल्लत दूर करने के लिए मांग रख दी।
उन्होंने केंद्रीय मंत्री से मांग की है कि प्रदेश में कुल पानी की खपत करीब तीन करोड़ 20 लाख एकड़ फुट है। इसकी पूर्ति तो हो ही नहीं सकती। लेकिन, प्रदेश का करीब 19 लाख एकड़ फुट पानी को लेकर पड़ोसी राज्य पंजाब से विवाद है।
उसका निपटारा कराया जाए। हालांकि, उन्होंने माना कि यह कमी 20 लाख एकड़ फुट से पूरी नहीं होगी। इसके लिए राज्य सरकार ने अपने स्तर पर प्रयास शुरू कर दिए हैं।
राज्य सिंचाई मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ ने सेमिनार में कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश में छह करोड़ 65 लाख की लागत से 400 इंजेक्शन बोर नहरों के किनारे करने का निर्णय लिया है। प्रदेश के 2600 जोहड़ों के जलस्तर को सुधारने का काम हो चुका है।
अब 1400 अन्य जोहड़ों को इस योजना में शामिल किया जाएगा। 500 जोहड़ों का काम सितंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। इतना ही नहीं, हर विधानसभा क्षेत्र में दो करोड़ रुपये खर्च करके नहर के पानी को जोहड़ तक पहुंचाने के लिए पाइप लाइन बिछाई जाएगी।
ड्रेन को भी रिचार्ज करने का काम किया जाएगा। कृषि मंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार पानी को बचाने के लिए नई तकनीकी पर काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के 21 जिलों के हर ब्लॉक के हर खेत तक पानी पहुंचाने की योजना पर काम कर रही है। प्रदेश में 1300 नहरों के टेल हैं। इनमें से 1017 की टेल तक पानी पहुंच चुका हैं। सरकार वर्ष 2025 तक प्रदेश के हर खेत तक पानी पहुंचाने के लिए पाइप लाइन बिछाएगी।
सरकार की 123 करोड़ की अनुमानित लागत से रियल टाइम इन्फॉर्मेशन सिस्टम तैयार करने की योजना है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से पानी के लिए नया कानून बनाने की भी सिफारिश की।
इनेलो विधायक को बुलाया मंच पर
पिहोवा से इनेलो विधायक जसविंदर सिंह संधू दर्शक दीर्घा में बैठे हुए थे। जब राज्य सिंचाई मंत्री की नजर उन पर पड़ी, तो उन्होंने मंच से उनका नाम घोषित करवाया और उन्हें मंच पर बुलाकर सम्मान दिया। उन्होंने मंच संचालन करने वालों से कहा कि इनेलो विधायक भी मंच से केंद्रीय मंत्री का स्वागत करेंगे।
चार अलग-अलग सत्रों में हुआ मंथन
केंद्रीय जल बोर्ड की ओर से आयोजित जलमंथन कार्यक्रम में जल बचाने की मुहीम से जुड़े देशभर से विशेषज्ञ आए। इसके साथ ही किसानों, यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों और अन्य लोगों ने भी भाग लिया। चार अलग-अलग सत्रों में भूजल के गिरते स्तर, भूजल को रिचार्ज करने, पानी को बचाने के लिए री-साइकिलिंग आदि मुद्दों पर चर्चा की गई।