कुरुक्षेत्र। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय सेवा केंद्र में युवाओं के लिए सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसका मुख्य विषय-मन की शांति, मधुर बोल और मधुर संबंधों द्वारा आंतरिक परिवर्तन कैसे संभव है, रहा। इस मौके पर बीके मधु बहन ने अहमदाबाद से पधारीं मुख्य वक्ता कला एवं संस्कृति प्रभाग की चेयरपर्सन और वॉइस चेयरपर्सन ऑफ यूथ विंग राज योगिनी ब्रह्माकुमारी चंद्रिका दीदी का परिचय दिया। पूर्व राज्य मंत्री सुभाष सुधा मुख्य अतिथि, एनआईटी के डायरेक्टर डॉ. बीवी रमना रेड्डी विशिष्ट अतिथि, कुवि यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. वीरेंद्र पाल विशेष अतिथि और केंद्र प्रभारी राज योगिनी ब्रह्माकुमारी सरोज बहन कार्यक्रम की संयोजिका रहीं।
मुख्य वक्ता राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी चंद्रिका दीदी ने अपने जीवन के अनुभव साझा किए। कहा कि उन्होंने जीवन के में लक्ष्य बनाए-पहला शादी नहीं करूंगी और दूसरा अपने जीवन को ईश्वरीय सेवा में समर्पित करूंगी। मेरी दोनों इच्छाएं पूर्ण हुईं। युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि मैं इसीलिए आगे बढ़ी क्योंकि मैंने बहुत अधिक आध्यात्मिक चिंतन किया और सभी महात्माओं, विवेकानंद, दयानंद जैसे महान आत्माओं के जीवन को पढ़ा।
पूर्व राज्य मंत्री सुभाष सुधा ने अपने कहा कि मोबाइल जहां मन को खराब करता है वहीं स्वास्थ्य पर भी प्रभाव डालता है। मोबाइल प्रयोग से सुख के साथ परेशानी भी मिल रही है। युवाओं को सीख दी कि सकारात्मक ऊर्जा यदि कहीं मिलती है तो यही पर मिलती है। एनआईटी के डायरेक्टर ने कहा कि हमें कैसे अपने जीवन को अपने तरीके से आगे बढ़ाना है। तनावपूर्ण समाज में अपनी खूबियों को स्वयं समझना और कैसे निभाना है-यह शायद विद्या प्रणाली में खो दिया है। एनआईटी में बनी थॉट लैब का परिचय देते हुए कहा कि बच्चों के आध्यात्मिक व्यक्तित्व विकास के लिए थॉट लैब बनी है, जिसमें हर वर्ष 300 नए छात्र इस विषय को लेते हैं।