कुरुक्षेत्र। भारतीय संगीत और नृत्य की परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के संगीत एवं नृत्य विभाग द्वारा आयोजित 12 दिवसीय तबला, गायन एवं नृत्य कार्यशाला का शुक्रवार को समापन हो गया। कार्यशाला में विभिन्न आयु वर्ग के प्रतिभागियों ने भारतीय शास्त्रीय संगीत, तबला व कथक नृत्य की बारीकियां सीखीं। समापन अवसर पर प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए।
मुख्य अतिथि भारत विकास परिषद की मैत्रेयी शाखा की अध्यक्षा डॉ. ममता सचदेवा ने कहा कि संगीत और नृत्य भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं। ये केवल मनोरंजन के साधन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक समरसता के संवाहक भी हैं। उन्होंने कहा कि शास्त्रीय संगीत और नृत्य की परंपराएं देश की सांस्कृतिक पहचान को विश्व स्तर पर स्थापित कर रही हैं तथा नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य कर रही हैं।
संगीत एवं नृत्य विभाग के अध्यक्ष डॉ. अशोक शर्मा ने कहा कि ऐसी कार्यशालाएं युवाओं को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने बताया कि 1 से 12 जून तक आयोजित कार्यशाला में प्रतिभागियों को शास्त्रीय गायन, तबला और कथक नृत्य का सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला के दौरान तबला प्रशिक्षण में ताल, लय और विभिन्न बोली की जानकारी दी गई, जबकि गायन में स्वर साधना, रागदारी संगीत और प्रस्तुति कौशल पर विशेष फोकस रहा। वहीं कथक नृत्य में हस्त मुद्राएं, भाव-अभिनय और मंच प्रस्तुति की तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया।