लाडवा में फाल्गुन माह शुक्ल पक्ष के प्रथम मंगलवार को लगने वाला हनुमान जी का 70वां वार्षिक मेला मंगलवार को ध्वजारोहण के साथ शुरू हुआ। चार दिवसीय इस मेले की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार व झंडा गीत के स्वरों के बीच साध्वी देवी सुदीक्षा सरस्वती जी से हुई। सुदीक्षा सरस्वती जी ने कहा कि हनुमान जी ने भक्ति के सेवा भाव की प्रमुखता का संदेश दिया। हनुमान जी सदा राम नाम का जप करते हैं क्योंकि राम नाम जप की महिमा अनूठी है। हनुमान जी ने दास्यभाव व सेवा से अपने इष्ट श्री राम को वश में कर लिया और मां सीता से अजर-अमर व गुणनिधि होने का वरदान प्राप्त किया।
इस अवसर पर सुनील गर्ग, विश्वेंद्रनाथ शर्मा, सोमप्रकाश शर्मा, बलदेवराज अरोडा, पार्षद अनिल माटा, जितेंद्रनाथ, रमेश बंसल, प्रदीप गर्ग, रघुबीर शरण सैन, नरेंद्र सैन, मा.फकीरचंद सिंगला, सुभाष बंसल, महेशकांत गोर्साइं, नीरज गर्ग व वेद प्रकाश सिंघल आदि मौजूद रहे। मेला शुरू होने के बाद हजारों लोगों ने हनुमान जी के दर्शन किए और सिंदूर, झंडा व लाल लंगोट चढ़ाए। मंदिर में दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जहां समाजसेवी संस्थाओं ने पेयजल, जूता स्टाल व प्राथमिक चिकित्सा का प्रबंध कर रखा था वहीं कई लोगों ने प्रसाद व भंडारे का आयोजन किया गया।
गौरतलब है कि समस्त उत्तर भारत में लगने वाला यह हनुमान जी का यह एकमात्र मेला है। बुजुर्गों को कहना है कि यह मंदिर राजा अजीत सिंह द्वारा बनवाये गए माता बालासुंदरी मंदिर के समय का है। मंदिर परिसर में मुख्य प्राचीन मंदिर में हनुमान जी की आठ फुट ऊंची प्रतिमा विराजमान है। इसके साथ ही बने मंदिरों में क्रम से भगवान चतुर्भुज विष्णु, संतोषी माता, राम दरबार, बाबा जहान सिंह नकुड वाले व मां दुर्गा की अष्टभुजी भव्य प्रतिमाएं विराजमान हैं व एक शिवालय बना हुआ है। रामेश्वर तालाब का जीर्णोद्धार करके उसके बीचोबीच एकादश रुद्रों की स्थापना की गई है।