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डीसी-एसपी को बाहर कर बंद कमरे में संतों से दो घंटे की बैठक में फीडबैक लिया सीएम ने

Thu, 16 Feb 2017 12:25 AM IST
ब्यूरो/कुरुक्षेत्र,अमर उजाला
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cm meeting with saint - फोटो : अमर उजाला
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संतों के पास समाज के बारे में जो फीडबैक थी उसे सवा दो घंटे की बैठक के दौरान मुख्यमंत्री के समक्ष रखा गया। सरकार और प्रशासन से जनता क्या उम्मीद रखती है, इस पर भी चर्चा की गई। रोहतक से आए तीन संतों से जाट आंदोलन पर भी फीडबैक लिया गया।  जिस संत समाज को फीडबैक लेने के लिए आमंत्रित किया गया था, उनमें से कुछेक की सुरक्षा कारणों से जांच की गई।
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बता दें कि बुधवार को कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल रेस्ट हाउस में आयोजित बैठक में संत समाज के करीब 28 प्रतिनिधि राज्य भर से पहुंचे थे। हालांकि इनमें कुछ संतों की भौंहें इस बात को लेकर तनी दिखी कि बैठक में आमंत्रित किए जाने के बावजूद उनकी चेकिंग की गई। पूछे जाने पर एक संत ने कहा कि यदि सुरक्षा के नाम चेकिंग ही करनी थी तो सभी संतों की होनी चाहिए थी। यदि संतों से भी सुरक्षा का खतरा था तो इन्हें आमंत्रित ही क्यों किया गया। उल्लेखनीय है कि डीसी और एसपी के अलावा अन्य सभी अधिकारियों को बैठक शुरू होने से पहले बाहर जाने के निर्देश सीएम ने खुद दिए। इसके बाद भीतर से कुंडी लगाकर यह बैठक करीब सवा दो घंटे तक चली थी।        
   
मुख्यमंत्री जी गोचरान की भूमि खाली करा दो             
धर्मनगरी में शायद यह पहली बार था जब सरकार ने संत समाज को आमंत्रित करके प्रादेश के ज्वलंत मुद्दों को हल करने के लिए सहयोग मांगा। मुख्यमंत्री ने भी चर्चा के दौरान यह बात कही कि राज्य में पहली बार इस दिशा में कदम बढ़ाया गया है, उन्होंने संत समाज से सामाजिक कुरीतियों को दूर करने, गोवंश संरक्षण और संवर्धन के साथ नशा मुक्ति, भ्रूण हत्या पर अंकुश और स्वच्छता मिशन जैसे मुद्दों का हल करने के लिए सहयोग की अपील की। हालांकि इस बैठक में कुछ संतों ने गोचरान की भूमि को खाली करने की आवाज भी उठाई। उदासीन पंचायती अखाड़ा के महंत महेश मुनि सहित अन्य दो संतों ने कहा कि मुख्यमंत्री जी अगर हरियाणा सरकार गोचरान की भूमि पर हुए कब्जों को हटवाने का काम करे तो गोवंश लावारिस होने से बच जाएगा।          
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अधिकारियों की बैठक रद्द      
संत समाज के साथ मुख्यमंत्री की बैठक से पहले कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल रेस्ट हाउस में जिला के अधिकारियों की बैठक तय थी। मुख्यमंत्री की इन दो बैठकों के लिए तय किये गए शेड्यूल के लिहाज से यहां दोपहर एक बजे अधिकारियों की बैठक होनी थी, जबकि उसके बाद सवा दो बजे संत समाज की बैठक में मुख्यमंत्री को शिरकत करनी थी, लेकिन एक घंटे देर होने के कारण अधिकारियों की बैठक रद्द कर सीएम ने संत समाज के साथ सवा दो बजे बैठक शुरू की। यह बैठक करीब सवा दो घंटे तक चली।        
  
रोहतक जिले से आए तीन संतों से जाट आंदोलन का फीडबैक लिया           
सुगबुगाहट इस बात को लेकर भी थी कि प्रदेशभर में चल रहे जाट आरक्षण आंदोलन पर भी संत समाज से मुख्यमंत्री बात करेंगे। हालांकि बैठक में मौजूद संतों से जब यह बात की गई तो उन्होंने इस बात से साफ इंकार किया। मगर जानकारी मिली है कि बैठक के अलावा रोहतक जिला से आए तीन संतों से इस बात पर अलग से चर्चा जरूर की गई। बताया गया है कि यह तीनों संत जाट आरक्षण आंदोलन पर बैठे जाट नेताओं से धरना स्थल पर जाकर मिले चुके हैं। इन संतों ने जाट नेताओं को स्पष्ट किया है कि सरकार उनके साथ है, चूंकि मामला न्यायालय में है, इसलिए सरकार के हाथ में फिलहाल कानूनी लड़ाई में सहयोग देने से ज्यादा कुछ नहीं है।       

जाट आरक्षण पर ज्ञानानंद बोले, हठी रवैया नहीं, सद्भावना जरूरी          
मुख्यमंत्री के साथ संत समाज की बैठक स्वामी ज्ञानानंद महाराज की पहल पर हुई थी। हालांकि बैठक में विश्व हिंदू परिषद की भी बड़ी भूमिका बताई गई है। अमर उजाला से बातचीत में स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने बताया कि गांवों में युवा चेतना जागृत करने के लिए सीधा संवाद, नशे की प्रवृति दूर करना, नैतिक शिक्षा का प्रचार प्रसार, स्वच्छता मिशन के जरिये समाज का बेहतर वातावरण तैयार करने का संदेश जन-जन तक पहुंचे, यही संत समाज का लक्ष्य है। जाट आरक्षण आंदोलन पर स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि किसी का भी हठी रवैया नहीं होना चाहिए। सबसे जरूरी है कि समाज में सद्भावना सुरक्षित हो। उन्होंने बताया कि रोहतक के कुछ संत इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए आंदोलनरत नेताओं से बातचीत कर चुके हैं। उन्हें पूरी स्थिति स्पष्ट की गई है। उन्हें उम्मीद है कि जल्द इस समस्या का हल होगा।
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