एक ओर गीता जयंती समारोह को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाने के लिए भरसक प्रयास किए जा रहे है और जिला प्रशासन के साथ-साथ प्रदेश सरकार की निगाहें भी इस समारोह पर टिकी हुई है। वहीं जिले के 12 अधिकारी ऐसे भी हैं जो सरकार व वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की परवाह नहीं कर रहे हैं। ये अधिकारी दिए जा रहे आदेशों की पालना करने में लापरवाही बरत रहे हैं तो वहीं इनमें से अधिकतर अधिकारी बिना बताए छुट्टी और स्टेशन छोड़ रहे हैं। इतना ही नहीं कई अधिकारी जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में भी बिना बताए गैर हाजिर रहे।
यह खुलासा खुद डीसी सुमेधा कटारिया ने किया। वे बुधवार को पंचायत भवन में अधिकारियों की बैठक को संबोधित कर रही थी। हालांकि उन्होंने इन अधिकारियों के नाम उजागर नहीं किए लेकिन कहा कि इस प्रकार से मनमानी व लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को अंतिम चेतावनी दी जा चुकी है और इसके बावजूद भविष्य में गलती को दोहराया तो उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। डीसी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव को लेकर पूरी दुनिया कुरुक्षेत्र की तरफ देख रही है। इसलिए सभी अधिकारियों को मुस्तैद रहकर महोत्सव की तैयारियों को अमलीजामा पहनाने का काम करना होगा।
उन्होंने कहा कि गीता जयंती समारोह के आगाज से पहले 30 नवंबर तक कुरुक्षेत्र जिला को खुले से शौचमुक्त बनाना हैं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने इच्छा जताई है कि 6 दिसंबर को राष्ट्रपति कुरुक्षेत्र को खुले से शौच मुक्त जिला घोषित करें। इसलिए सभी अधिकारी अपनी ड्यूटी का निर्वाह पूरी ईमानदारी से करें। इस मामले में जरा सी भी कोताही सहन नहीं की जाएगी।