कुरुक्षेत्र। सरकार के नियम चाहे जो भी हों, लेकिन मेडिकल बायोवेस्ट के प्रति बरती जा रही लापरवाही लोगों के जीवन से खिलवाड़ साबित हो रही है।
हालात ये है कि नगर में प्राइवेट अस्पताल ही नहीं, बल्कि जिले के सरकारी अस्पताल से भी मेडिकल बायोवेस्ट का उठान नहीं हो रहा।
अधिकारियों के सामने ही लापरवाही हो रही है, लेकिन अस्पताल प्रशासन पूरी तरह से मौन है। जिला स्वास्थ्य विभाग ने एक प्राईवेट एजेंसी को मेडिकल बायोवेस्ट उठाने का ठेका देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली, लेकिन इसके बाद किसी भी अधिकारी ने यह जानने तक की जहमत तक नहीं उठाई की कि एजेंसी के कर्मी अपना काम पूरी तरह से कर रहे हैं या नहीं।
अधिकारियों की इसी लापरवाही का पूरा फायदा एजेंसी के कर्मी कर रहे हैं, जिसका प्रमाण सिविल अस्पताल परिसर में बने टीबी अस्तपाल की बिल्ंिडग के निकट देखा जा सकता है। यहां रखे डस्टबिन में और बाहर मेडिकल बायोवेस्ट पड़ा है, जिसमें इंजेक्शन, सिरिंज, रक्त की पट्टियां और अन्य गंदगी शामिल है।
यह हालत पिछले कई दिनों से है और जो कर्मी रोजाना मेडिकल बायोवेस्ट उठाने के लिए सरकारी अस्पताल आते हैं, उनके द्वारा यह लापरवाही हो रही है। अस्पताल में आने वाले मरीजों और उनके परिवारवालों का कहना है कि सरकारी अस्पताल के चिकित्सक और अन्य स्टाफ भी इस ओर ध्यान नहीं देते। हैरत की बात तो यह है कि दिन में कई बार यहां से गुजरने वाले स्टाफ को एजेंसी के कर्मियों की लापरवाही नजर नहीं आती।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मुकेश ने कहा कि वे अभी अवकाश पर हैं और सोमवार को आकर चेक करेंगे। यदि ऐसा पाया गया तो एजेंसी के अधिकारियों से बातचीत की जाएगी। उन्होंने बताया कि मेडिकल बायोवेस्ट उठाने का ठेका विभाग की ओर से रुद्राक्ष कंपनी को दिया है और उसके कर्मियों की आरे से लापरवाही बरतने की शिकायत उच्चाधिकारियों से भी की जाएगी।
नगर के एक बड़े प्राइवेट अस्पताल के द्वारा जो लापरवाही बरती जा रही है, वह भी कम नहीं। गीता निकेतन आवासीय विद्यालय के गेट के ठीक सामने एक खाली प्लाट में उक्त प्राइवेट अस्पताल का मेडिकल कचरा न केवल यहां डाला जा रहा, बल्कि रात होने पर इसमें आग लगाकर इसे नष्ट भी किया जाता है।
इस प्लाट से चंद कदम पर दूर स्थित इस बड़े प्राइवेट अस्पताल के खिलाफ ऐसी लापरवाही बरतने के लिए प्रशासन, नगर परिषद या स्वास्थ्य विभाग किसी ने भी कोई कार्रवाई नहीं की, जबकि एक कॉलेज, नगर के दो बड़े स्कूल और शहर का पॉश रिहायशी इलाके में ऐसा होना लोगों के लिए घातक साबित हो सकता है।