अपनी पत्नी अनीता सिंहल के साथ एसडीएम थानेसर कार्यालय पहुंचे नरेंद्र सिंहल।
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कुरुक्षेत्र। लाडवा नगर पालिका पार्षद चुनाव के साथ-साथ चेयरमैन पद के लिए तैयारी कर रहे नरेंद्र सिंघल को शुक्रवार को उस समय बड़ा झटका लगा, जब नई वोटर लिस्ट प्रकाशित होकर अधिकारियों के पास पहुंची। इस लिस्ट में अपना व अपनी पत्नी का नाम न मिलने पर वे दंग रह गए। वह अधिकारियों के पास पहुंचा, जहां पर भी उन्हें कोई राह दिखाई नहीं दी, जिसके बाद उसे अदालत का सहारा लेने का निर्णय लेना पड़ा।
नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन रहे नरेंद्र सिंघल का नाम वोटर लिस्ट से कैसे गायब हुआ, यह भी उनकी व अधिकारियों की समझ से परे है। जिसके चलते एसडीएम ने इसकी जांच के आदेश भी दे दिए हैं। नरेंद्र सिंघल ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि वह लाडवा नगर पालिका के 1987 से लेकर 1991 तक चेयरमैन रहे हैं जबकि वर्ष 1991 से 1995 तक वह पार्षद रहे। हालांकि इसके बाद उसका वार्ड नं 11 रहा अब वार्ड नं 12 बन गया है, लेकिन वह इस बार महिला आरक्षित होने के चलते अपनी पत्नी अनिता सिंघल को चुनाव लड़ाने के लिए तैयारी कर रहा था।
वह पार्षद के साथ-साथ चेयरमैन पद के लिए भी काफी दिनों से तैयारी में जुटा था, लेकिन आज प्रकाशित होकर आई वोटर लिस्ट ने उसकी सभी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। उसका और उसकी पत्नी अनिता सिंघल का नाम भी वोटर लिस्ट से गायब मिला। उन्होंने बताया कि दोनों का आज भी विधानसभा चुनावों की वोटर लिस्ट में नाम है। लेकिन इस वोटर लिस्ट में कैसे उनके नाम व वोट कट गए, उन्हें भनक भी नहीं लगी। जबकि वह नामांकन की तैयारी में भी लगा था। अब वह चुनाव लडना तो दूर वोट भी नहीं डाल सकेगा।
एसडीएम ने दिए जांच के आदेश
नरेंद्र सिंघल अपनी पत्नी के साथ मामले को लेकर एसडीएम सतबीर कुंडू के पास पहुंचे, जहां वह भी मामले को जानकर हैरान रह गए। उन्होंने तत्काल ही वोट काटे जाने की नगर पालिका सचिव को जांच के आदेश दिए। वहीं एसडीएम ने उन्हें यह भी स्पष्ट कर दिया कि अब नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसके चलते नियमानुसार उनका नाम वोटरलिस्ट में शामिल करने का अधिकार उपायुक्त के पास भी नहीं।
लूंगा अदालत का सहारा
नरेंद्र सिंघल ने बताया कि वह अब अदालत का सहरा लेेंगे। अदालत ने वर्तमान हालात को देख वोटरलिस्ट में उनका नाम शमिल किए जाने या फिर चुनाव लड़ने की अनुमति दी तो वह अपनी पत्नी को अवश्य ही चुनाव लड़ाएंगे।