संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग की ओर से आयोजित पांच दिवसीय नाट्य उत्सव के अंतिम दिन मनीष जोशी नर्देशित दास्तान-ए-रोहनात नाटक का मंचन किया गया। इस नाटक के माध्यम से हरियाणा के 1857 के गुमनाम योद्धाओं की कहानी प्रस्तुत की गई। कलाकारों ने मंचन में रोहनात गांव में अंग्रेजों की क्रूरता एवं बर्बरता को दर्शाया।
हरियाणा के रोहनात गांव में 29 मई 1857 को ब्रिटिश फौज ने बदला लेने के इरादे से बर्बर खूनखराबे को अंजाम दिया था। बदले की आग में ईस्ट इंडिया कंपनी के घुड़सवार सैनिकों ने पूरे गांव को नष्ट कर दिया। लोग गांव छोड़कर भागने लगे और पीछे रह गई वो तपती धरती जिस पर दशकों तक कोई आबादी नहीं बसी। रोहनात गांव, हरियाणा के हिसार जिले के हांसी शहर से कुछ मील की दूरी पर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। गांव वालों से बदला लेने के लिए ब्रिटिश सेना की टुकड़ी ने रोहनात गांव को तबाह कर दिया।
बागी होने के संदेह में उन्होंने निर्दोष लोगों को पकड़ा, पीने का पानी लेने से रोकने के लिए एक कुएं के मुंह को मिट्टी से ढक दिया और लोगों को फांसी पर लटका दिया। अंधाधुंध दागे गए गोलों की वजह से लगभग 100 लोग मारे गए। रोहनात गांव को अंग्रेजों ने उजाड़ कर उसकी 22 हजार बीघे जमीन महज 800 रुपये में नीलाम कर दी। नाटक में रोहनात गांव के लोगों की वीरता एवं बलिदान को दर्शाया गया।
मुख्यातिथि उपायुक्त मुकुल कुमार ने कहा कि युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग ने जिस संजीदगी के साथ नाट्य उत्सव का आयोजन किया है वह अपने आप में अद्भुत, अनूठा एवं निराला है। विभाग के निदेशक डॉ. महासिंह पूनिया ने मेहमानों का स्वागत किया। इस मौके पर कुलसचिव डॉ. संजीव शर्मा, डॉ. रामनिवास, डॉ. परमेश, डॉ. दलीप सिंह, प्रो. शुचिस्मिता, प्रो. सुनील ढीगड़ा, डॉ. अशोक शर्मा, डॉ. ज्ञान चहल, डॉ. दीपक बब्बर, डॉ. गुरचरण, डॉ. मधुदीप, डॉ. कामराज, मुख्य सुरक्षा अधिकारी डॉ. चांद राम जिलोवा आदि उपस्थित रहे।