मारकंडेश्वर मंदिर से श्रद्धालुओं को प्रशासन द्वारा बाहर निकाले जाने से उनमें रोष पनप गया। नायब तहसीलदार परमिंद्र सिंह संधू की अगुवाई में पहुंचे प्रशासनिक अमले ने मंदिर परिसर को खाली करा दिया। श्रद्धालुओं और सेवादारों का आरोप है कि प्रशासन ने मंदिर परिसर में सख्ती बरती है और गलत तरीके से उनको मंदिर से बाहर किया गया। एडवोकेट सुरेंद्र टिवाना ने कहा कि छह महीने में पहली बार ऐसा हुआ है जब मंदिर के कपाट बंद करने पड़े। प्रशासन की टीम ने श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत करने का काम किया है। इस मामले को लेकर वह विधायक व मंत्री से मिलेंगे और इस तरह का व्यवहार धार्मिक संस्थाओं में नहीं चलने देंगे।
बता दें प्रत्येक रविवार को मारकंडेश्वर मंदिर में दूर-दराज से श्रद्धालु पूजा अर्चना के लिए आते हैं, लेकिन करीब 11 बजे नायब तहसीलदार परमिंद्र सिंह संधू टीम के साथ मंदिर में पहुंचे और वहां से सभी श्रद्धालुओं को बाहर कर दिया। इसके पश्चात मंदिर के प्रवेश द्वार पर बेरिकेट लगा दिया गया और होम गार्ड्स की ड्यूटी लगा दी ताकि कोई श्रद्धालु मंदिर परिसर में प्रवेश न करें।
नहीं दिखाया मंदिर खाली कराने का आदेश
एडवोकेट सुरेंद्र टिवाना ने कहा कि उन्होंने नायब तहसीलदार से यह मांग की कि अगर उनके पास मंदिर खाली कराने के आदेश हैं तो सभी को वह आदेश दिखाए जाए, लेकिन नायब तहसीलदार किसी तरह के आदेश मौके पर नहीं दिखा सके। टिवाना ने कहा कि बिना आदेशों के मंदिर परिसर को खाली करवाने के पीछे प्रशासन का मकसद समझ नहीं आया है। उन्होंने कहा कि जनसम्मेलनों के समय प्रशासन की आंखे बंद हो जाती हैं। इसलिए प्रशासन को मंदिर के कपाट बंद कराने से पहले जनसम्मेलनों पर रोक लगानी चाहिए।
एसडीएम ने दे दिया नोटिस
नायब तहसीलदार परमिंद्र सिंह संधू ने कहा कि एसडीएम ने पहले से ही लिखित में आर्डर दे रखा है कि मंदिर परिसर में भीड़ एकत्रित न करें, लेकिन रविवार को मंदिर परिसर में भीड़ थी। यहां किसी तरह से सोशल डिस्टेंसिंग की पालना नहीं की हुई थी। इसी कारण प्रशासन को सख्ती करनी पड़ी।