पहाड़ी क्षेत्र में हो रही बरसात के चलते मारकंडा नदी पिछले कई दिनों से उफान पर है। उफान के चलते मारकंडा नदी का पानी नदी के किनारों को छू रहा है।
मारकंडा नदी के तटबंधों पर बसे गांवों व डेरा वासियों के अलावा जिस क्षेत्र में मारकंडा नदी का पानी ओवरफ्लो होकर तबाही मचाता है, उस क्षेत्र के किसानों की रातों की नींद उड़ी हुई है। गांव झांसा में मारकंडा नदी का पानी 7312 क्यूसेक चल रहा है।
गांव झांसा के किसान मुख्त्यार सिंह, बलदेबा, काशी, रमेश बिल्लू तथा अन्य ने बताया कि धान की फसल निसारे पर है और अब सावन का महीना बीत जाने के बाद भी मारकंडा नदी उफान पर चल रही है, जिस कारण किसानों की चिंताएं कम होने का नाम नहीं ले रही।
किसानों ने बताया कि नदी की सफाई न होने के कारण नदी में आया पानी उसके तटबंधों के किनारों को छू रहा है तथा कई किसानों के खेतों में तो मारकंडा नदी का पानी ओवरफ्लो होकर घुस भी गया है, जिससे धान की फसल के खराब होने का आसार बन गए हैं।
ये कहते हैं नहरी विभाग के एसडीओ
एसडीओ दलबीर सिंह ने कहा कि मारकंडा नदी का पानी 841 गेज पर चल रहा है तथा खतरे का निशान 842.5 गेज है। उन्होंने बताया कि नदी का जल स्तर खतरे के निशान से कम है।
फिर भी विभाग मारकंडा नदी के कमजोर तटबंधों पर निरंतर निगरानी रखे हुए है। उन्होंने कहा कि किसानों व डेरा वासियों को घबराने की जरूरत नहीं है।