संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र/शाहाबाद। मानसून की शुरूआत ही भारी पड़ने लगी है। हिमाचल के कालाअंब व आसपास के क्षेत्र में हो रही लगातार बारिश के चलते क्षेत्र में भी मारकंडा नदी उफान पर बहने लगी है, जिसके पानी ने अंबाला के हेमा माजरा से होते हुए आधा दर्जन गांवों तक मार कर दी है।
करीब 18 हजार एकड़ फसल पानी में डूब गई है, जिसमें भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
वहीं सोमवार देर शाम तक मारकंडा का जलस्तर 23 हजार क्यूसेक तक पहुंच गया जबकि मुलाना क्षेत्र में यह जलस्तर 24 हजार क्यूसेक तक दर्ज किया गया। बारिश जारी रहने व रुन एवं बेगना नदियों का पानी भी इसमें आ जाने के चलते जलस्तर और भी बढ़ने की संभावना जताई जाती रही। पानी ने गांव कठवा, गुमटी, कलसाना, मलकपुर, मुगल माजरा और तंगौर के खेतों तक मार की है जबकि कठवा व पट्टी जामड़ा गांव तक भी पानी पहुंचा। गांव के प्राथमिक स्कूल में भी जलभराव हो गया। ऐसे हालात में किसानों में चिंता दिखाई पड़ने लगी है जबकि प्रशासन ने आसपास की ग्राम पंचायतों को खुद के इंतजाम करने व सतर्क रहने को कहा है। पंचायत विभाग की ओर से ग्राम पंचायतों को भेजे पत्र में स्पष्ट किया गया है कि वे बाढ़ के हालात बनने पर इससे निपटने के लिए तैयारी रखें। सरपंच जेसीबी मशीन, मिट्टी से भरे थैले, रस्सी व अन्य सामान की व्यवस्था करें और यदि गांव से लोगों को पलायन करना पड़ा तो स्कूल व अन्य किसी जगह पर रहने के लिए भी व्यवस्था देखी जाए। वहां बिजली-पानी जैसी सुविधाएं भी हों।
देर शाम तक जलस्तर बढ़ने की रही संभावना ः कालाअंब में तैनात गेज रीडर कश्मीरा के मुताबिक सोमवार सुबह मारकंडा में जलस्तर आठ हजार क्यूसेक था, जबकि मुलाना में गेज रीडर पवन ने बताया कि सोमवार शाम चार बजे 24 हजार क्यूसेक दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि मुलाना से पहले बहने वाली बरसाती नदी रुन, बेगना का पानी मारकंडा में मिलने से जलस्तर बढ़ने की संभावना है।
नष्ट हो चुकी फसल ः क्षेत्र के किसान राजबीर, सूरता, जोगिन्दर, हरबंस सिंह, जितेंद्र सहित अन्य ने कहा कि गांव हेमा माजरा से पानी खेतों के रास्ते कई गांवों में फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है। इनमें गांव डाडलु, पाडलु, रावा और दामली के खेतों में फसलों पर असर डाल रहा है। करीब 1800 एकड़ क्षेत्र में धान की फसल को नुकसान हो चुका है। उन्होंने कहा कि हर साल फसलों का नुकसान होता है, लेकिन बचाव का कोई स्थायी हल नहीं किया जा रहा।
फसलों का किया जाए सर्वेक्षण, नुकसान की हो भरपाई ः उधर, 25 जून को हुई तीन घंटे की बारिश से गांव नलवी, तंगौर, तंगोरी, मनदेहड़ी, राय माजरा, रायपुर, मद्दीपुर, बोरीपुर, नगला, कलसानी, भोकर माजरा, सुलखनी, मामुमाजरा, कलसाना और झरोली के खेत पानी से लबालब है। इससे धान की फसल गलने लगी है।