शारदीय नवरात्र को लेकर मंदिरों में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। हालांकि कोविड-19 को देखते हुए मंदिर प्रबंधन की ओर से अपने नवरात्र में होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों में काफी बदलाव किए गए हैं। 52 शक्तिपीठों में से एक श्री देवीकूप भद्रकाली मंदिर में नवरात्रों के दौरान श्रद्धालुओं की काफी भीड़ लगी रहती है। इस बार कोविड-19 के खतरे को देखते हुए मंदिर प्रबंधन की ओर से विशेष तैयारी की गई।
श्री देवीकूप भद्रकाली मंदिर के पीठाध्यक्ष पंडित सतपाल शर्मा ने बताया कि कोविड-19 को देखते हुए सरकार की गाइडलाइन का पूर्णत: पालन किया जाएगा। मंदिर में सभी कार्यक्रम पहले की भांति ही होंगे, लेकिन उन कार्यक्रमों के प्रारूप में बदलाव करके उनको सूक्ष्म बनाया गया है। 16 अक्तूबर को सुबह साढ़े 9 बजे कलश पूजन होगा, 10 बजे ध्वजारोहण तथा 11 बजे ज्योति यात्रा श्री देवीकूप की परिक्रमा की जाएगी। इन कार्यक्रम में सीमित संख्या में ही लोग हिस्सा लेंगे। 17 अक्तूबर प्रथम नवरात्र से सुबह 6 बजे मंगला आरती, दोपहर 12 बजे भंडारा भोग आरती तथा शाम साढ़े बजे संध्याकालीन आरती होगी।
उन्होंने बताया कि 22 अक्तूबर सप्तमी को हवन यज्ञ का आयोजन होगा तथा दुर्गाष्टमी 52 शक्तिपीठ ज्योति पूजन किया। दुर्गाष्टमी को होने वाले जागरण की परंपरा को निभाते हुए शाम 6 बजे से 9 बजे तक 52 शक्तिपीठ ज्योति पूजन ही किया जाएगा। कोविड-19 के खतरे को देखते हुए नवरात्र में सभी परंपराओं को निभाया जाएगा, लेकिन सूक्ष्म रूप से निभाई जाएगी। उन्होंने कहा कि आत्मरक्षा सबसे बड़ा धर्म है। कोरोना के खतरे से बचने के लिए सभी श्रद्धालु मां से प्रार्थना करें। इस बार जागृति ही जागरण है। कोरोना महामारी से जागृत होकर ही इससे बचा जा सकता है तथा इस जागरण में हमें सभी का सहयोग जरूरी है।
फेसबुक पेज पर लाइव होगी मां की आरती
पीठाध्यक्ष सतपाल शर्मा ने बताया कि मंदिर के फेसबुक पेज पर मां भगवती की सुबह व शाम की आरती लाइव दिखाई जाएगी। सभी श्रद्धालु अपने घर से ही मां भगवती के दर्शन करें।
थर्मल स्क्रीनिंग और बिना मास्क नहीं होगा प्रवेश
पीठाध्यक्ष सतपाल शर्मा ने बताया कि कोविड-19 के खतरे को देखते हुए मंदिर को दिन में तीन बार सैनिटाइज किया जाएगा। बिना थर्मल स्क्रीनिंग और बगैर मास्क के किसी भी श्रद्धालुओं को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। मंदिर परिसर में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा। श्रद्धालुओं से अपील है कि रेलिंग और मंदिर की दीवारों को न छुए तथा बाहर से खरीदा प्रसाद भी मंदिर परिसर में न लेकर आए। उन्होंने बताया कि 10 साल से छोटे बच्चों को मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा बुजुर्ग और बीमार लोग मंदिर आने की बजाए घर पर ही प्रार्थना करें।
पहले इस प्रकार होते थे कार्यक्रम
श्री देवीकूप भद्रकाली मंदिर में नवरात्र महोत्सव को बड़े धूमधाम और प्राचीन परंपराओं के साथ मनाया जाता है, लेकिन कोविड-19 के खतरे को देखते हुए इस बार शारदीय नवरात्रों को सूक्ष्म रूप से सभी परंपराएं निभाई जाएगी। मालूम हो कोरोना महामारी से पूर्व पूरे नगर में कलश यात्रा निकाली जाती थी, जिसमें 5100 महिलाएं कलश लेकर परिक्रमा करती थी। इसके अलावा 1100 से 2100 झंडे तथा 52 शक्तिपीठ के रूप में 52 त्रिशुल के साथ भव्य शोभा यात्रा निकाली जाती थी। इस यात्रा में झांकियां आकर्षण केंद्र होती थी। उधर, दुर्गाष्टमी पर होने वाले जागरण में भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु हिस्सा लेते थे।