जिले में रविवार को हुई बारिश से एक तरफ जहां लोगों को गर्मी से राहत मिली वहीं बारिश के कारण मंडी में रखी धान की फसल भीग गई। इससे किसानों को आर्थिक हानि उठानी पड़ेगी। शहर की मंडियों में धान की आवक शुरू हो गई है। शनिवार तक कुल 3885 क्विंटल धान कुरुक्षेत्र की नई अनाज मंडी में पहुंच गई है।
धान की आवक शुरू होने के साथ ही कुरुक्षेत्र मार्केट कमेटी थानेसर के तैयारियों के दावे फेल होते दिख रहे है। शनिवार से रविवार तक लगातार रूक-रूक कर हो रही बारिश की वजह से मंडी में कुल आवक का करीब 1500 क्विंटल धान बारिश में भीग गया है। मंडी में 5 शेड के पास पानी व धान एक साथ पड़ा है। मंडी के पांचों शेड के नीचे धान रखे जाने के कारण किसानों को मजबूरन शेड के बिना धान रखना पड़ रहा है। जिससे धान सूखने से पहले ही मौसम की पहली मार बरसात में ही भीग गया है।
पानी के जमाव से डेंगू का भी खतरा
मार्केट कमेटी द्वारा बरसात के उचित प्रबंध करने का दावा बेकार साबित हो रहा है। पूरी मंडी के चारों तरफ पानी-पानी इकट्ठा हो रहा है। जहां एक तो धान की आवक भीग गई है तो वहीं दूसरी ओर ठहरे पानी की वजह से डेंगू के लारवे का पनपने का मौका मिल जाएगा। जिसको लेकर विभाग सतर्क नहीं है। वैसे भी मंडी में धान की सीजन में प्रतिदिन सैकड़ों मजदूर व किसान मंडी का दौरा कर रहे है। इस दौरान अगर यहां पर डेंगू का डंक किसी को लग गया तो उसकी जिम्मेवारी कौन लेगा यह सोचने का विषय है।
ये थे पिछली बार के आंकडे़
मार्केट कमेटी के आंकड़ों की बात मानें तो पिछले वर्ष कुल 25 लाख 59 हजार 147 क्विंटल धान की आवक हुई थी। वहीं इस बार धान की आवक बढ़ने के आसार ज्यादा है। वहीं बात अगर मंडी में धान को रखने की व्यवस्था भगवान भरोसे ही रहने को मजबूर है क्योंकि मंडी में केवल 5 शेड ही है जिसमें केवल 10 लाख क्विंटल के आसपास धान को रखा जा सकता है। अगर इस वित्त वर्ष में मंडी में धान की रिकार्ड आवक होती है तो विभाग के हाथ खड़े हैं।
वर्जन
सरकार प्रति वर्ष अक्टूबर के प्रथम दिन से धान की खरीद शुरू करती है। विभाग द्वारा धान की आवक के चलते सारे इंतजाम किए गए है। जिसमें पीने का पानी, सफाई व्यवस्था व लाइट का प्रबंध है। सरकारी धान का रेट 1450 निर्धारित कर रखा है। मंडी से बरसात के पानी को निकालने के लिए 7 सफाई कर्मी लगे हुए है। जल्द ही सारा पानी निकाल दिया जाएगा। मंडी की सफाई के लिए ठेका भी दे रखा है। उनके कर्मी भी सफाई कर रहे है। अगर आज पानी नहीं निकलता है तो वे सोमवार को 5 टैंकर मंगवाकर पूरी मंडी का पानी सुखा देंगे।
गौरव आर्य, सचिव, मार्केट कमेटी थानेसर
इस वर्ष एक लाख 17 हेक्टेयर में धान की रोपाई की गई है। वहीं पिछली बार एक लाख 15 हजार हेक्टेयर की भूमि पर धान पैदा किया गया था। अगर बात अगेती की करें तो 60 प्रतिशत भृूमि पर खेती की गई और 40 प्रतिशत बासमती व 620 प्रतिशत नॉन-बासमती की पैदावार की गई।
डॉ. वजीर सिंह, कृषि अधिकारी, कुरुक्षेत्र