इस बार आढ़तियों को बारदाने पर अपना लेबल लगाना होगा। उन्हें लेबल लगे बैग में ही गेहूं की भराई होगी तभी उठान होगा। खरीद के इस नए नियम से आढ़तियों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। जिसका प्रदेश के सभी आढ़ती विरोध कर रहे है। नए नियम के मुताबिक आढ़तियों को बैग पर अपनी फर्म का नाम, दुकान नंबर, साल तथा एजेंसी का नाम (जिस एजेंसी को गेहूं बेचा जाएगा) प्रिंट कराना होगा। वहीं सरकार की तरफ से आढ़तियों को बैग पर प्रिंट करने के लिए 20 पैसे प्रति बैग देने का आश्वासन दिया गया है।
आढ़तियों का कहना है कि बैग प्रिंट करने के लिए उनको अतिरिक्त लेबर की जरूरत होगी और अतिरिक्त भुगतान भी करना होगा। इससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ जाएगा। थानेसर अनाज मंडी एसोसिएशन के प्रधान सुशील सिंगला ने बताया कि बैग प्रिंट कराने पर आढ़तियों को सवा रुपये प्रति बैग की दर से भुगतान करना होगा। इस कार्य को करने के लिए अलग से दो मजदूर की जरूरत पड़ेगी और प्रिंट करने में समय भी लगेगा, जबकि कोरोना महामारी के चलते मंडी में पहले ही मजदूर की संख्या कम है। 10-15 साल पहले भी इस नियम को लागू किया गया था, बाद में आढ़तियों की मांग को देखते हुए रद्द कर दिया गया था। अब फिर इस नियम को लागू किया गया है, लेकिन सरकार की तरफ से 20 पैसे प्रति बैग की जगह दो रुपये प्रति बैग दिया जाना चाहिए ताकि आढ़तियों पर आर्थिक बोझ न पड़े। संवाद
प्लास्टिक के कट्टे की बजाए बोरी उपलब्ध कराए: बंसल
एसोसिएशन के महासचिव हरविंद्र बंसल ने कहा कि बारदाने में सरकार प्लास्टिक के कट्टे की बजाए बोरियां उपलब्ध कराए, क्योंकि प्लास्टिक के कट्टे पर प्रिंट नहीं होगा। वहीं हर बार आढ़ती कम बारदाना मिलने की शिकायत करते है, इसलिए सरकार सीजन से पहले बारदाना मुहैया कराए ताकि आढ़ती समय रहते तैयारी कर सकें।
यहां दो एजेंसी करती है खरीद
यहां मुख्यत: दो एजेंसी हैफेड व डीएफसी गेहूं की खरीद करती है। पिछले सीजन में एजेंसियों ने जिलेभर से 496370 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की थी। इसमें डीएफसी ने 310144 एमटी, हैफेड ने 174274 एमटी, एफसीआई ने 2403 तथा एचडब्ल्यूसी ने 9549 एमटी गेहूं की खरीद की थी।