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फिर से घरों व दुकानों में घुसा पानी, निकालने के लिए लगाए जनरेटर भी पांच मिनट में लगे हांफने

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साढ़े पांच घंटे की बारिश से इस बार भी घरों और दुकानों में पानी घुस गया। कोई बर्तन तो कोई वाइपर से पानी को बाहर करता नजर आया। शहर की सड़कें नदियों की तरह बहीं, जबकि पांच दिन पहले हुए जलभराव से सबक लेते हुए इस बार पुख्ता प्रबंध के दावे पहले से बहुत ज्यादा मजबूत थे, लेकिन सोमवार को हुई 46 एमएम बारिश के आगे सब धराशायी हो गए।
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महाराणा प्रताप चौक स्थित घरों और दुकानों में फिर से पानी घुस गया, जिसे निकालने के लिए नहरी विभाग द्वारा यहां तीन जनरेटर लगाए गए। पांच मिनट चलने के बाद ही ये जनरेटर हांफते दिखाई दिए। वहीं, जाट धर्मशाला के समीप मिट्टी नीचे बैठ जाने से बिजली के खंभों सहित तीन ट्रांसफार्मर सड़क किनारे गिर गए, हालांकि बिजली निगम द्वारा पहले ही इस एरिया की बिजली काट दी गई थी। बारिश के चलते शाम तक इन ट्रांसफार्मर ऐसे ही सड़क किनारे पड़े रहे। उधर, लघु सचिवालय के डीआरओ कार्यालय में प्रशासन द्वारा बाढ़ कंट्रोल रूम बनाया गया है। मजेदार बात यह है कि लघु सचिवालय परिसर खुद बारिश के पानी से लबालब हो गया। यहां पहुंचे के लिए लोगों को पानी से गुजरकर जाना पड़ा।
बारिश के कारण शहर में छोटा बाजार, गोशाला बाजार, सब्जी मंडी, शास्त्री मार्केट, राजेंद्र नगर कुटिया वाली गली, गुरुनानक कॉलोनी, झांसा रोड, नए और पुराने बस अड्डे के सामने, पटियाला बैंक कॉलोनी, अमीन रोड, जाट धर्मशाला से ब्रह्मसरोवर की ओर जाने वाली सड़क, बिरला मंदिर के सामने, महाराणा प्रताप चौक स्थित दुकानों और घरों में, थानेसर बाजार, पिपली ओवर ब्रिज के नीचे, पिपली अनाज मंडी के मेन गेट पर, सरस्वती कॉलोनी सहित कई क्षेत्रों में हर तरफ पानी ही पानी नजर आया। दोबारा से शहर में हुए बाढ़ जैसे हालात को लेकर इस बार लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर था। मौके पर पहुंच रहे अधिकारियों को तो खरी-खरी सुननी पड़ ही रही थी, वहीं लोगों ने विधायक को भी खूब निशाने पर लिया। महाराणा प्रताप चौक स्थित दुकानदार बोले कि चार दिन से सुनते आ रहे हैं कि इस बार बारिश में किसी को कोई परेशानी नहीं होगी, अधिकारियों को पुख्ता प्रबंध के निर्देश दिए हैं, कहीं कोई दिक्कत हो तो तुरंत समाधान होगा। बड़ी बड़ी बातों के बावजूद पांच घंटे की बारिश में शहर डूब गया। यदि कुछ घंटे बारिश और हो जाती तो उन्हें दुकान की छत पर बैठना पड़ता।
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बारिश के दौरान के जाट धर्मशाला के समीप तीन ट्रांसफार्मर गिर जाने से आसपास के एरिया में बिजली गुल रही। वहीं सेक्टर-17, किशनपुरा, झांसा रोड का एरिया, दिदार नगर, शांति नगर, सेक्टर-5 व 8, बिरला मंदिर के समीप व आसपास के कई इलाकों में शाम तक बिजली गुल रही, हालांकि मौसम ठंडा रहने से लोगों को परेशानी नहीं हुई।
प्रशासन की तरफ से लघु सचिवालय के डीआरओ कार्यालय में बाढ़ कंट्रोल कक्ष स्थापित किया गया है। इस कक्ष का बाकायदा टेलीफोन नंबर 01744-221035 भी जारी किया गया है। कोई भी नागरिक अपने क्षेत्र से संबंधित बरसाती पानी और बाढ़ से संबंधित बचाव के लिए 24 घंटे सूचना दे सकता है।
उपायुक्त मुकुल कुमार ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि इस बरसात के सीजन में पिपली से लेकर ज्योतिसर तक सरस्वती चैनल पर सिंचाई विभाग के अधिकारी फोकस रखेंगे, क्योंकि सरस्वती चैनल में पहले ही कैपेसिटी से ज्यादा पानी चल रहा है, अगर ज्यादा बरसात आई तो यह पानी समस्या पैदा कर सकता है। इसलिए सिंचाई विभाग के अधिकारी इस क्षेत्र पर निगाहे रखेंगे और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहेंगे। इस वर्ष पानी की निकासी को लेकर लोगों को जो दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं, अब आगामी सीजन में लोगों को किसी प्रकार की समस्या नहीं आनी चाहिए। इस पानी की समस्या से निजात दिलाने के लिए नगर परिषद, हुडा, जन स्वास्थ्य विभाग और लोक निर्माण विभाग के अधिकारी आपसी तालमेल के साथ काम करे और अपनी जिम्मेवारी को समझें तथा समस्या को दूर करने के लिए किसी दूसरे विभाग को दोष मत दें।
शहर में पानी की निकासी की समस्या को लेकर नगर परिषद अधिकारियों के पास सुबह से फोन बजने लगे। सेनेटरी इंस्पेक्टर ने बताया कि उनके पास करीब 150 फोन आए। नप के सभी अधिकारी व 100 से ज्यादा कर्मचारी सुबह से व्यवस्था बनाने में लगे हुए हैं। वहीं तीन पंप द्वारा जगह-जगह से पानी निकाला जा रहा है।
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