फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kurukshetra News: मुख्य खबर<bha>--</bha>राज्यपाल ने 112 विद्यार्थियों को दी पीएचडी की डिग्री, 89 को गोल्ड मेडल

विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। समारोह में छात्र-छात्राएं अपनी डिग्री दिखाते हुए। संवाद ।
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में शनिवार को दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया। हरियाणा के राज्यपाल और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो. आशिम कुमार घोष ने दीक्षांत समारोह में अलग-अलग विषयों में पीएचडी के 112 विद्यार्थियों को डिग्री दी। 89 विद्यार्थियों को अपनी-अपनी कक्षाओं में प्रथम स्थान हासिल करने पर गोल्ड मेडल और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया। समारोह में पीएचडी सहित पीजी और यूजी के करीब 3000 विद्यार्थियों को डिग्री देकर सम्मानित किया गया। दीक्षांत समारोह में दीक्षांत समारोह की स्मारिका का विमोचन भी किया गया।
विज्ञापन


इस दौरान कुलाधिपति ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि पीएचडी, यूजी, पीजी की डिग्री हासिल करने के बाद अब युवा पीढ़ी अपने अगले लक्ष्य की तरफ आगे बढ़ेगी। यह युवा पीढ़ी नवाचार, उद्यमिता के क्षेत्र में सराहनीय कार्य करके भारत को वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने में अहम भूमिका अदा करेगी।




इससे पहले कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की तरफ से राज्यपाल की ओर से सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश राजेश बिंदल, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शील नागू, न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता, न्यायाधीश न्यायमूर्ति कुलदीप तिवारी, न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेश भारद्वाज, न्यायाधीश न्यायमूर्ति अलका सरीन को सर्टिफिकेट ऑफ ऑनर देकर सम्मानित किया गया।
विज्ञापन


नौकरी मांगने के बजाय देने वाले बनें युवा : राज्यपाल



राज्यपाल प्रो. आशिम घोष ने विद्यार्थियों से नवाचार, उद्यमिता और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल शिक्षा की यात्रा का समापन नहीं बल्कि एक नई जिम्मेदारी की शुरुआत है। भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से निर्धारित विकसित भारत 2047 का लक्ष्य एक राष्ट्रीय मिशन है जिसके वास्तविक शिल्पकार देश के युवा हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को पारंपरिक नौकरी तक सीमित न रहने और नौकरी मांगने के बजाय नौकरी देने वाले बनने की प्रेरणा दी।
न्यायमूर्ति राजेश बिंदल ने युवाओं को पढ़ाया हर परिस्थिति पार करने का पाठ

न्यायमूर्ति राजेश बिंदल ने कहा कि यदि राष्ट्र सशक्त होगा, तो हम सभी स्वतः सशक्त होंगे। यदि हम केवल अपनी व्यक्तिगत प्रगति के बारे में सोचेंगे, तो हम अपने कर्तव्यों का पूर्ण रूप से निर्वहन नहीं कर पाएंगे। क्योंकि जो कुछ भी हमें मिला है, वह इसी राष्ट्र की देन है। इसलिए राष्ट्र के प्रति योगदान देना हमारा पहला और सबसे बड़ा कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि जीवन में चाहे कैसी भी परिस्थितियां क्यों न आएं, हमें सदैव सकारात्मक सोच रखनी चाहिए और कुछ नया, कुछ अच्छा सृजन करने का प्रयास करते रहना चाहिए।

दीक्षांत समारोह शिक्षा का अंत नहीं बल्कि एक नई शुरुआत : प्रो. सचदेवा

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि विद्यार्थी गीता के उपदेश को अपने जीवन में आत्मसात करें, जो उनको सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। जीवन में आगे बढ़ते हुए अनेक चुनौतियां आएंगी लेकिन उन्हें सकारात्मकता से पार करना है।

कुरुक्षेत्र। समारोह में छात्र-छात्राएं अपनी डिग्री दिखाते हुए। संवाद ।

कुरुक्षेत्र। समारोह में छात्र-छात्राएं अपनी डिग्री दिखाते हुए। संवाद ।

कुरुक्षेत्र। समारोह में छात्र-छात्राएं अपनी डिग्री दिखाते हुए। संवाद ।

कुरुक्षेत्र। समारोह में छात्र-छात्राएं अपनी डिग्री दिखाते हुए। संवाद ।

कुरुक्षेत्र। समारोह में छात्र-छात्राएं अपनी डिग्री दिखाते हुए। संवाद ।

कुरुक्षेत्र। समारोह में छात्र-छात्राएं अपनी डिग्री दिखाते हुए। संवाद ।

कुरुक्षेत्र। समारोह में छात्र-छात्राएं अपनी डिग्री दिखाते हुए। संवाद ।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें