कुरुक्षेत्र। मातृभूमि शिक्षा मंदिर की ओर से शनिवार को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर भाषा संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों के मध्य संभाषण का कार्यक्रम भी हुआ। मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने भाषा संवाद के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस बहुभाषावाद और सांस्कृतिक विविधता के प्रति सम्मान को बढ़ावा देता है।
संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा वर्ष 2000 से यूनेस्को ने प्रतिवर्ष 21 फरवरी को भाषाई और सांस्कृतिक विविधता तथा बहुभाषावाद के विषय में जागरुकता को बढ़ावा देने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाने की शुरुआत की। दुनिया भर में 8,324 भाषाएं हैं, जिनमें से कई वैश्वीकरण और सामाजिक परिवर्तनों के कारण खतरे में हैं। भारत जैसे विशाल बहुभाषी देश में मातृभाषा के रूप में 19,569 भाषाएं या बोलियां बोली जाती हैं। मातृभाषाएं सामाजिक सांस्कृतिक पहचान एवं सामूहिक ज्ञान और बुद्धिमत्ता का भंडार हैं। निरंतर उपयोग से ही भाषाएं समृद्ध होती हैं और हर दिन एक मातृभाषा दिवस होना चाहिए। एक दिन मनाने से भाषाओं को संरक्षित एवं जीवंत नहीं बनाया जा सकता। घरों में बातचीत में शामिल कर ही इसे प्रशासन, तकनीकी क्षेत्रों तक पहुंचाया जा सकता है। आवश्यकता है देश में पठन-पाठन अधिक से अधिक मातृभाषा में हो। भाषा संवाद कार्यक्रम में बच्चों को पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर मिशन के सदस्य मौजूद रहे।