संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। सरस्वती के प्रति लोगों की श्रद्धा बढ़ती जा रही है। इसी कड़ी में सरस्वती मां का एक भव्य मंदिर पिपली रिवर फ्रंट के साथ ही बनाया जाएगा। अभी तक प्रदेश में मां सरस्वती का कोई भी मंदिर नहीं है। इस मंदिर को बनाने की रूपरेखा सरस्वती हेरिटेज बोर्ड ने समाजसेवियों के साथ मिलकर तैयार की गई है। यह जानकारी बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमिच ने दी।
किरमिच शनिवार को पिपली जू के सामने सरस्वती नदी के तट पर प्रदीप कुंद्रा की ओर से आयोजित भंडारे के दौरान बातचीत कर रहे थे। इससे पहले उपाध्यक्ष किरमच ने मां सरस्वती की पूजा-अर्चना करके भंडारे का शुभारंभ किया। उपाध्यक्ष ने कहा कि प्रयास किए जा रहे हैं कि अक्तूबर के अंत तक सरस्वती रिवर फ्रंट पिपली का कार्य आरंभ हो जाएगा। सभी प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं।
पिपली रिवर फ्रंट आने वाले समय के लिए एक बहुत बड़ा प्रोजेक्ट है। पिपली ऐतिहासिक टूरिस्ट हब बनेगा, क्योंकि दिल्ली से लेकर अमृतसर तक वह चंडीगढ़ तक जीटी रोड पर केवल सरस्वती यहां से क्रॉस होती है, इसलिए यहां पर भव्य मंदिर का निर्माण व सरस्वती रिवर फ्रंट से श्रद्धालुओं व पर्यटकों को एक बड़ा ही सुंदर वातावरण मिलेगा।
उन्होंने कहा कि आदिबद्री से लेकर कैथल तक 122 गांव सरस्वती के किनारे लगते हैं। इनमें से करीब 75 गांव में सरस्वती के किनारे मंदिर है, जिनमें ज्यादातर शिव मंदिर हैं। सभी मंदिरों में हर साल बसंत पंचमी के अवसर पर भंडारों का आयोजन किया जाता है। यदि यहां पर मंदिर बना तो आने वाले समय में यह विश्वस्तरीय पर्यटक स्थल बन जाएगा। अक्तूबर में यह कार्य सरस्वती रिवर फ्रंट का शुरू हो जाएगा। इस मौके पर डॉ राकेश जंगम, पूर्व सरपंच बीड़ पिपली दिनेश कुमार, राम नारायण मदान, देशराज शर्मा, माणक सिंह, ऋषभ कुंद्रा, आदित्य आदि मौजूद रहे।