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भगवान शिव काल से भी परे हैं, इसलिए उन्हें माना जाता है अजर-अमर : आचार्य कुश

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कुरुक्षेत्र। मारकंडेय मंदिर में कथा में प्रवचन देते आचार्य प. कमल कुश। विज्ञप्ति - फोटो : samvad
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कुरुक्षेत्र। ऋषि मारकंडेय प्राकट्योत्सव के अवसर पर मारकंडा नदी के तट पर श्री मारकंडेश्वर महादेव मंदिर ठसका मीरां जी में अखिल भारतीय श्री मारकंडेश्वर जनसेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत जगन्नाथ पुरी के सानिध्य में आयोजित शिव पुराण की कथा में व्यासपीठ से कथा वाचक आचार्य पं. कमल कुश ने बताया कि भगवान शिव अपने भक्तों पर हमेशा अपार कृपा करते हैं और उनकी पूजा कल्याणकारी होती है।
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भगवान शिव काल से भी परे हैं, इसलिए उन्हें अजर-अमर माना जाता है। ऋषि मारकंडेय प्राकट्योत्सव के दूसरे दिन स्वामी पृथ्वी पुरी एवं स्वामी रामनाथ पुरी ने अन्य संतों के साथ यजमान परिवार के सदस्यों को शिव मंदिर में अभिषेक करवाया। इसके बाद हवन यज्ञ में आहुतियां दी गईं। प्राकट्योत्सव के अवसर पर मंदिर में निरंतर महामृत्युंजय जाप भी विद्वान ब्राह्मणों की ओर से किया जा रहा है। कथा में आचार्य पं. कमल कुश ने बताया कि ऋषि मारकंडेय भगवान शिव के परम भक्त हैं और उन्हें भगवान शिव कृपा से अमरत्व का वरदान प्राप्त हुआ। उन्होंने कथा में बताया कि मरणासन्न व्यक्ति की प्राण रक्षा में समर्थ महामंत्र महामृत्युंजय की ख्याति ऋषि मारकंडेय के ही कारण है।
इस मंत्र पर लोक आस्था इतनी अधिक है कि वैदिक मंत्र होने के बावजूद महामृत्युंजय मंत्र मारकंडेय रचित माना जाता है। मारकंडेय इतने महान ऋषि हैं कि उनकी उपस्थिति भगवान श्रीराम के युग से पहले, श्रीराम कथा में और तदनंतर महाभारत काल तक सुलभ है। दूसरे दिन की कथा में व्यासपीठ पर स्वामी रामनाथ पुरी, स्वामी पृथ्वी पुरी, स्वामी सीता राम एवं यजमान परिवारों ने पूजन और आरती की। इस अवसर पर स्वामी संतोषनंद, स्वामी अमर दास, यज्ञ आचार्य प. नरेश शर्मा, प. दिनेश शर्मा, प. केशव शरण कांशी, प. पवन शर्मा, प. छत्रपाल शर्मा, प. केशव शर्मा, प. अंकुर शास्त्री, प. मनीष शर्मा, वृद्धावन धाम से प. हरिओम शर्मा, रामकुमार सैनी, रवि सैनी, मामला मंगला, यजमान सरजा सिंह, विकास शर्मा, शशि राणा आदि मारकंडेय पूजन में भी शामिल हुए।
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