एलएनजेपी अस्पताल प्रशासन की अनदेखी कहें या फिर मरीजों की लापरवाही, दोनों ही स्वास्थ्यकर्मियों एवं मरीजों की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं, क्योंकि अस्पताल के सबसे संवेदनशील क्षेत्र यानी प्रसूति विभाग में मरीज कोविड-19 नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि जच्चा ही नहीं, वहां उपस्थित तीमारदार भी कोरोना संक्रमण को हल्के में ले रहे हैं। वैसे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर देशभर में जन आंदोलन अभियान के तहत कोविड-19 नियमों की पालना करने के लिए शपथ दिलाई जा रही है, ताकि कोरोना संक्रमण से बचाव हो सके, लेकिन यहां मरीज मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग को न अपनाकर स्वयं कोरोना संक्रमण को न्योता दे रहे हैं। अगर ऐसे ही हालत रहे तो स्वास्थ्य विभाग ही नहीं मरीजों के लिए भी यह घातक साबित हो सकता है।
बता दें कि कुरुक्षेत्र जिले में अब तक कोरोना संक्रमित 6113 मरीज सामने आ चुके हैं, जबकि 96 मरीजों ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया है। कोरोना संक्रमण को गंभीरता से लेते हुए अस्पताल प्रशासन की ओर से वैसे तो अस्पताल परिसर में कोरोना के लक्षण एवं बचाव सहित दो गज की दूरी और सोशल डिस्टेंसिंग बरतने को लेकर हिंदी भाषा में पर्चे चस्पाये गए हैं, ताकि हर कोई इन्हें पढ़कर कोविड-19 के नियमों की पालना करें, लेकिन यहां सब उल्टा है, अस्पताल में पंजीकरण कराने से लेकर ओपीडी और दवाईयां लेने की लिए मरीजों की भीड़ उमड़ी रहती है।
कुरुक्षेत्र में 51 नये कोरोना संक्रमित मरीज आए सामने
जिला सिविल सर्जन डॉ. सुखबीर सिंह ने कहा कि कुरुक्षेत्र से 60 मरीजों को एक ही दिन में ठीक होने पर अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है, जबकि कुरुक्षेत्र में कोरोना से संक्रमित 51 नये केस सामने आए हैं। अभी तक लिए गये 94 हजार 805 में से 88 हजार 12 सैंपलों की रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी है। कुरुक्षेत्र में अभी 454 मरीज एक्टिव केस हैं।
मरीजों को किया जा रहा है जागरूक, प्रसूति विभाग का किया औचक निरीक्षण : डॉ. ममगाईं
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. शैलेंद्र ममगाईं शैली का कहना है अस्पताल प्रशासन की ओर से बार-बार मरीजों को कोविड-19 के प्रति जागरूक किया जा रहा है, बाकायदा अस्पताल परिसर में कई जगह पर्चे पर चस्पाये गये हैं, ताकि मरीज अपना बचाव रखें। उन्हें सोमवार को भी अस्पताल के प्रसूति विभाग का औचक निरीक्षण किया था। इस दौरान अधिकतर मरीज बिना मास्क जरूर मिले, लेकिन मरीजों एवं तीमारदारों को भी जागरूक किया गया। भविष्य में भी अस्पताल प्रशासन की ओर से सख्ती बरती जाएगी।