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शराब कारोबारी हत्याकांड : पुलिस की सात टीमों ने कुरुक्षेत्र से चंड़ीगढ़ तक खंगाले 250 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे

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संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र/शाहाबाद। शराब कारोबारी शांतनु की हत्या के बाद पुलिस की सात टीमें आरोपियों को पकड़ने के लिए चंडीगढ़, पंजाब व हिमाचल तक दौड़ लगाती रही। जीरकपुर से लेकर चंडीगढ़ तक अब तक 250 से ज्यादा कैमरे खंगाल चुकी है लेकिन 50 घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ बदमाशों का कोई सुराग नहीं लगा। पुलिस अधीक्षक नीतीश अग्रवाल ने मामले की जांच के लिए गठित टीमों की अलग-अलग जिम्मेदारी सौंपी है।
पुलिस को संदेह है कि हत्या में कुख्यात काला राणा गैंग का हाथ हो सकता है, क्योंकि नोनी राणा नाम के एक इंस्टाग्राम अकाउंट से हमले की जिम्मेदारी ली गई थी। हत्या के बाद पुलिस ने मौके से बरामद कारतूस के खोलों को हथियार की पुष्टि के लिए मधुबन फोरेंसिक लैब भेजा गया है और जब्त बाइक से सुराग तलाशे जा रहे हैं। एसपी अग्रवाल ने कहा कि हमलावरों के तौर-तरीकों और हथियारों से लगता है कि वे पेशेवर शूटर थे। हालांकि पुलिस अभी तक हत्या का कारण स्पष्ट नहीं कर पा रही है। सोशल मीडिया पर गैंगों के बीच जिम्मेदारी लेने की होड़ ने अन्य शराब कारोबारियों में दहशत फैला दी है।
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हर एंगल से की जा रही जांच : एसपी
एसपी नीतिश अग्रवाल का कहना है कि हत्याकांड की जांच हर एंगल से की जा रही है। आरोपियों को भी जल्द काबू कर लिया जाएगा, जिसके बाद ही पूरा मामला स्पष्ट हो पाएगा।




अन्य ठेकेदारों को भी टटोलने में लगे अधिकारी, आज हो सकती है बैठक

जिले में 56 शराब ठेकों की नीलामी 28 जोनों में होती है, प्रत्येक जोन में दो ठेके हैं। इस बार शांतनु ने 10 जोन, बर्दर ग्रुप ने 17 और वीएम वाइन ने एक जोन लिया था। हत्याकांड के बाद कारोबारियों में भय दिखाई दे रहा है, जिसके चलते जिला आबकारी नियंत्रक जगदीप उनके मन को टटोलने में लगे हैं। इसके लिए सोमवार को ठेकेदारों की बैठक बुलाए जाने की भी तैयारी की गई, जिसमें पुलिस अधीक्षक के साथ मुलाकात कर सुरक्षा का भरोसा दिया जा सके। उधर आबकारी अधिकारी ने बताया कि ठेकों पर बिक्री सामान्य है और पुलिस को शाम के समय गश्त बढ़ाने को कहा गया है।
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शांतनु जिले में पांच साल से कर रहा था शराब का कारोबार
शांतनु जिले में कई सालों से शराब के कारोबार से जुड़ा हुआ था। वह पिछले पांच सालों से ज्यादा सक्रिय हो गया था और जिले के प्रमुख ठेकेदारों में उसकी गिनती होने लगी थी। इस बार उसके पास 20 ठेके थे, जो सरकार को करोड़ों का रवेन्यू दे रहे हैं। शांतनु शुरू में वह कादयान एंड कंपनी के नाम से ठेके लेता था। वह बाद में वी टाऊन और अब वह शांतनु एंड कंपनी के नाम से शराब ठेकों की बोली देता था। शांतनु की हत्या के बाद से अब तक उसके ठेकों पर बिक्री में कोई असर देखने को नहीं मिला है। सभी ठेकों का संचालन व कर्मचारी व उसके परिजन और दोस्त कर रहे हैं।
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