कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में लेटर बम के हुए धमाके की चर्चा थम नहीं रही है। इससे प्रशासनिक माहौल भी गर्माया हुआ है। इस धमाके ने विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों और अधिकारियों के बीच तनाव पैदा कर दिया है तो वहीं कर्मचारियों और अधिकारियों के धड़ाधड़ हो रहे तबादले भी चर्चा का विषय बने हुए हैं।
लेटर बम के धमाके के बाद शुरु हुआ तबादलों का दौर अभी तक जारी है। कई प्रतिष्ठित पदों पर आसीन अधिकारियों को भी अचानक उनके पदों से हटाए जाने की चर्चा है। ये बदलाव विश्वविद्यालय के कामकाज पर भी असर डाल सकता है। लेटर बम ने विवि प्रशासन में पारदर्शिता और निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब उच्चाधिकारियों के तबादलों को लेकर भी चर्चा जोरों पर है तो वहीं लेटर बम में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम पर हर कोई कयास लगाता दिखाई दे रहा है कि क्या कार्यवाही की जाएगी। विधानसभा चुनाव में तथा चुनाव परिणाम के बाद भी विवि में लेटर बम की राजनीतिक और प्रशासनिक गहमागहमी चर्म पर है।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव से भी इस्तीफा मांगे जाने की चर्चा शुरू हो गई है। विधानसभा चुनाव से जोड़ते हुए इस संबंध में संदेश भी वायरल हो रहा है जबकि कुलपति प्रो सोमनाथ सचदेवा का कहना है कि ऐसा कोई मामला उनके संज्ञान में नहीं है। वहीं इस संबंध में कुलसचिव से संपर्क नहीं हो सका।
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पीएम व शिक्षा मंत्री तक को भी लेटर भेजे जाने का दावा
विधानसभा चुनाव के कुछ दिनों बाद वायरल हुए इस लेटर में कई सवाल उठाए गए हैं। इसमें विभिन्न कर्मचारियों और अधिकारियों के कामकाज में पारदर्शिता की कमी तथा अन्य पार्टी को समर्थन देने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। यह लेटर प्रधानमंत्री से लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री सहित 14 जगहों पर भी भेजे जाने का दावा किया गया है। विश्वविद्यालय में जैसे ही पिछले दिनों यह लेटर वायरल हुआ था तो तरह-तरह की चर्चाएं भी शुरू हो गई थी। विश्वविद्यालय में किए जा रहे तबादले अब खुले तौर पर इस लेटर से जुड़े होने बताए जाने लगे हैं। विद्यार्थियों से लेकर शिक्षकों और अधिकारियों में इस लेटर बम की पूरी चर्चा है। हालांकि कुछ अधिकारियों का कहना है कि यह पत्र महज शरारत है।