संवाद न्यूज एजेंसी
पिहोवा। गिरते भूजल स्तर को रोकने के प्रति किसानों को जागरूक करने के लिए गांव तलहेड़ी में किसान प्रशिक्षण शिविर एवं प्रदर्शनी आयोजित की गई। इसमें विशेषज्ञों ने किसानों को धान की सीधी बिजाई से होने वाले लाभ पैदावार और तरीकों की जानकारी दी।
सवाना सीड्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रयास से आयोजित इस कार्यक्रम में अमेरिका से कृषि विशेषज्ञों की टीम पहुंचीं। उन्होंने धान की किस्म फुलपेज सावा 134 की सीधी बिजाई का प्रशिक्षण किसानों को दिया। इस दौरान किसानों को प्रदर्शनी दिखाकर अधिकारियों ने उनके सवालों के जवाब भी दिए।
राइसटेकइंक एवं सवाना सीड्स के ग्लोबल सीईओ कार्स्टन ने बताया कि पारंपरिक धान की खेती का पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। अंधाधुंध जल के दोहन से भूजल की कमी और हानिकारक ग्रीन हाउस गैस जैसे सीओटू और एनटूओ का उत्सर्जन पैदा हो रहा है। इसके भयावह परिणामों से बचने के लिए पारंपरिक धान की खेती छोड़कर डीएसआर तकनीक से सीधी बिजाई जरूरी है।
अधिकारी अजय राणा ने बताया कि एक किलो चावल की पैदावार में करीब तीन हजार लीटर पानी की खपत होती है। इसे रोकने के लिए तकनीक फुलपेज पर भी काम कर रहा है। फुलपेज हर्बिसाइड टॉलरेंट चावल एक समान अंकुरण, बेहतर प्रारंभिक वृद्धि और पौधे की ताकत और सबसे महत्वपूर्ण प्रभावी खरपतवार नियंत्रण प्रदान करता है जो अन्यथा डीएसआर अपनाने में प्रमुख बाधाएं हैं।
किसान रणधीर सिंह ने बताया कि वह पिछले 60 साल से धान की सीधी बिजाई कर रहे हैं। यह तकनीक एक समान अंकुरण और प्रभावी खरपतवार नियंत्रण प्रदान करती है। इस मौके पर मनोज माहुली, मनोज सिंह, राजेश कुमार, सनी सिंधु, आलोक विश्वकर्मा व हरदीप सिंह सहित किसान मौजूद रहे।