करोड़ों रुपये से बनी इमारत में लाखों की मशीनें कबाड़ हो रही हैं। ये मशीनें नौ वर्ष पहले खरीदी गई थीं और अभी तक इनका उपयोग नहीं किया गया है। प्रदेश के एकमात्र श्रीकृष्णा आयुर्वेदिक कॉलेज और अस्पताल परिसर में प्रदेश की पहली और एकमात्र आयुष ड्रग टेस्टिंग लैब व फार्मेसी के लिए इमारत बनाई गई थी। इसके लिए लाई गईं मशीनों की आज तक पैकिंग तक नहीं खुल पाई है।
इमारत पर लटका ताला प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री से लेकर विभाग के महानिदेशक के निरीक्षण के दौरान ही खुल था। 31 जनवरी को सेवानिवृत्त हो चुकी राजरानी को लैब की सुप्रींटेंडेंट बनाया गया था, लेकिन यह नियुक्ति भी कागजों तक ही सिमट कर रह गई। नियुक्ति से लेकर सेवानिवृत्ति तक उन्हें भी विभाग ने डेपुटेशन पर मुख्यालय में ही रखा। प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लाख दावे कर रहे हैं, लेकिन लैब और फार्मेसी की हालत उसके दावों की पोल खोल रही है।
अनिल विज कर चुके हैं आयुष यूनिवर्सिटी का दावा
प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने हाल ही में दावा किया है कि प्रदेश के एकमात्र आयुर्वेदिक कॉलेज और अस्पताल को आयुष यूनिवर्सिटी के रूप में स्थापित किया जाएगा। इसके लिए तैयारी शुरू कर दी है। पूर्व की सरकार ने भी इसे यूनिवर्सिटी का दर्जा देने का दावा किया था, लेकिन उसके लिए बनाई गई कमेटी रिपोर्ट से आगे नहीं बढ़ पाई।
महानिदेशक के निर्देशों पर भी नहीं हुई शुरू
आयुष विभाग के महानिदेशक साकेत कुमार ने 21 जनवरी को यहां निरीक्षण किया था। वह भी लैब और फार्मेसी की हालत देखकर दंग रह गए थे। उन्होंने इसे 10 दिन में शुरू करने के निर्देश दिए थे। लैब के लिए कॉलेज के रस शास्त्र विभाग के शिक्षक रविराज को, जबकि फार्मेसी के लिए शिक्षिका डॉ. विदुषी को इंचार्ज बनाया था। समयसीमा पूरी होने के बाद भी आज तक ताला नहीं खुल पाया है।
लैब में होनी है दवाओं की टेस्टिंग
फार्मेसी में आयुर्वेदिक दवाइयां बनाई जानी हैं तो लैबोरेटरी में उनकी टेस्टिंग की जानी है। इसके अलावा बाहर से आने वाली आयुर्वेदिक दवाओं के टेस्ट भी यहीं होने हैं। इन दोनों के शुरू न होने से दूसरे प्रदेशों से आयुर्वेदिक दवाएं लेनी पड़ रही हैं। साथ ही कॉलेज में पढ़ने वाले विद्यार्थी भी दवा बनाने के नुस्खे आदि की जानकारी से महरूम है।
भवन बना चोरों का निशाना
वर्ष 2007 में बना भवन सरकार और विभाग की अनदेखी के चलते चोरों का निशाना बन रहा है। अनेकों बार चोर यहां से पंखे आदि चोरी कर चुके हैं। करीब 20 दिन पहले भी भवन के शीशे तोड़ एक युवक अंदर घुस गया था। उसे मौके पर ही दबोच लिया गया था।
इंचार्ज और मैडम ने पल्ला झाड़ा
विभाग के महानिदेशक साकेत कुमार ने कॉलेज के शिक्षक रविराज को लैब का इंचार्ज बना दिया था। लेकिन, लैब शुरू न होने और भवन के जर्जर होने की बात पर वे पल्ला झाड़ते नजर आए। उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी कॉलेज की जिम्मेदारी संभाल रहीं डॉ. उषा दत्त ही दे सकती हैं। उन्हें तो महज 15 दिनों पहले ही चार्ज मिला है। उन्होंने बताया कि करीब 30 लाख की मशीनें आई हुई हैं। अन्य मशीनें भी आएंगी। इस संबध्ंा में डॉ. उषा दत्त ने बताया कि लैब का इंचार्ज शिक्षक रविराज को बनाया गया है। वही इसके लिए पूरी तरह से जिम्मेदार हैं। वह लैब को जल्द शुरू करने के लिए विभाग के महानिदेशक से बातचीत करेंगीं।