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एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी ने ले ली नवजात की जान

Thu, 23 Jun 2016 12:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कुरूक्षेत्र
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मासूम को एंबुलेंस ने कुचला - फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
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सिविल अस्पताल प्रशासन की लापरवाही ने एक नवजात की जान ले ली। गंभीर हालत में चंडीगढ़ रेफर किए गए कुछ घंटे पहले पैदा हुए बच्चे के लिए पहले तो एंबुलेंस देरी से मिली, जब एंबुलेंस आई तो पता चला उसमें ऑक्सीजन सिलेंडर तो है, लेकिन उसमें ऑक्सीजन नहीं है। ऐसे में दूसरे एंबुलेंस का इंतजाम किया गया, लेकिन जब तक दूसरी एंबुलेंस आई तब तक नवजात ने दम तोड़ दिया था। अब अस्पताल प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और एंबुलेंस का रखरखाव करने वाले दो कर्मचारियों को नोटिस जारी किए हैं। रेफर होने के बाद प्रसूता और उसके परिजन करीब 3 घंटे तक अस्पताल गेट पर बच्चे को लेकर खड़े रहे।
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गांव समानी निवासी जयकुमार ने बताया कि रविवार को रात करीब साढ़े नौ बजे उसकी पत्नी सोनिया को सिविल अस्पताल में भर्ती किया गया था। सोनिया ने सोमवार तड़के करीब साढ़े 4 बजे नॉर्मल डिलीवरी से बेटे को जन्म दिया। प्री मैच्योर डिलीवरी होने से बच्चे की हालत नाजुक थी। जांच के बाद डॉक्टर ने उसे चंडीगढ़ पीजीआई रेफर किया था।

तीन घंटे तक एंबुलेंस का इंतजार
जयकुुमार ने बताया कि बच्चे को सुबह 6:35 मिनट पर रेफर कर दिया गया था। रेफर होने के बाद परिजन बच्चे को लेकर अस्पताल गेट पर पहुंच गए। यहां वे एंबुलेंस का इंतजार करते रहे। लेकिन काफी देर तक एंबुलेंस नहीं आई। जब आई तो बच्चे को लेकर परिजन तुरंत उसमें सवार भी।
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जब ऑक्सीजन लगाने की तैयारी की गई तब पता चला कि सिलेंडर तो खाली है। इसके बाद दूसरी एंबुलेंस का इंतजार करने के लिए कहा गया। जब तक दूसरी एंबुलेंस आई तीन घंटे गुजर चुके थे। सुबह करीब साढ़े नौ बजे जब यह दूसरी एंबुलेंस आई तब तक नवजात दम तोड़ चुका था। नवजात की मौत से परिजनों को गहरा सदमा लगा और उन्होंने अस्पताल की व्यवस्था को इसका जिम्मेदार बताया।

दो एनएमटी को नोटिस जारी
अस्पताल के आला अधिकारियों को जब इस बात की सूचना मिली तो उन्होंने इसे गंभीरता से लिया। सीएमओ डॉ. एसके नैन ने दो ईएमटी  (इमरजेंसी मेडिकल टेक्निशियन) को नोटिस जारी कर दिए। दोनों से लापरवाही पर स्पष्टीकरण मांगा है।

40 ऑक्सीजन सिलेंडर, लेकिन जान नहीं बची
खास बात यह है कि सिविल अस्पताल में किसी भी स्थिति से निपटने के लिए 40 ऑक्सीजन सिलेंडर हर समय रहते हैं। सीएमओ डॉ. नैन के मुताबिक इन सिलेंडरों का उपयोग इमरजेंसी के वक्त ही किया जाता है। ऐसे में सवाल यह है कि अस्पताल में 40 सिलेंडर मौजूद होने के बाद भी नवजात के लिए एक सिलेंडर मुहैया नहीं हो पाया और उसकी जान चली गई।

सरासर लापरवाही
जब बच्चा पैदा हुआ उसका वजन 1  किलो 200 ग्राम था। बच्चे की मौत, सरासर लापरवाही है। मामले की  जांच सिविल अस्पताल के मेडिकल सुप्रीटेंडेंट को सौंपी है। जांच के बाद लापरवाही करने वाले संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।  -डॉ. एसके नैन, जिला सिविल सर्जन
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