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ये है देश की ए-प्लस ग्रेड और प्रदेश की मदर यूनिवर्सिटी का हाल, खाली पड़ा है डीओसी का पद

Sat, 27 Jun 2020 12:29 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो अमर उजाला, कुरुक्षेत्र
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कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी - फोटो : अमर उजाला
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पिछले करीब 25 साल में यह पहला मौका है, जब देश की ए-प्लस ग्रेड और हरियाणा की मदर यूनिवर्सिटी केयू में डीन ऑफ कॉलेजिज जैसा महत्वपूर्ण पद तीन माह से खाली है।
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यह हालात तब हैं, जब कुछ दिन पहले रैंकिंग में शिक्षकों और अन्य खामियों के कारण कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी का रैंक एक पायदान नीचे आया है। हद यह है कि तीन माह से जहां डीन आफ कालेजिज का पद खाली है, वहीं इस समय केयू में कुलपति और रजिस्ट्रार जैसे दोनों प्रमुख पदों को कार्यवाहक संभाल रहे हैं।

हरियाणा के सात जिलों के करीब 175 कालेज कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के अधीन हैं और इसमें दो लाख से ज्यादा विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। इसके बावजूद महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति की अनदेखी समझ से परे है। 1996 के बाद यह पहला मौका है, जब डीन ऑफ कालेजिज का पद ना केवल तीन माह से खाली है, बल्कि जिम्मेदारी के लिहाज से केयू को आटो मोड पर छोड़ दिया गया है।
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बता दें कि डा. कैलाश चंद्र शर्मा का केयू के कुलपति पद से कार्यकाल 31 मार्च 2020 को समाप्त होने के बाद कार्यवाहक कुलपति का जिम्मा रजिस्ट्रार डा.नीता खन्ना को सौंपा गया था। इस नियुक्ति के बाद कई पदों पर फेरबदल हुए, यहां तक की कार्यवाहक रजिस्ट्रार पद पर नई नियुक्ति भी हुई, मगर डीन ऑफ कालेजिज के पद पर नियुक्ति नहीं हो सकी।
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तो क्या स्थायी कुलपति ही करेंगे डीओसी नियुक्त

डीओसी का पद हासिल करने के लिये कई बड़े चेहरे प्रयासरत हैं, मगर इनमें चार का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। इनमें डिपार्टमेंट ऑफ मैनेजमेंट की प्रोफेसर डा.सुदेश, डिपार्टमेंट ऑफ इलेक्ट्रानिक प्रोफेसर डा.अनिल वोहरा, प्रोफेसर सुरेश कुमार और डा.आरके देसवाल शामिल हैं।

बताया यह भी जा रहा है कि डीओसी पद पर नियुक्ति स्थायी कुलपति के अधिकार क्षेत्र में होती है और जब तक केयू में कार्यवाहक की जगह स्थायी कुलपति पदभार नहीं संभालते, तब तक संभव है यह पद खाली रहे। पिछले दिनों केयू के नये कुलपति के लिये ईसी की बैठक में सर्च कमेटी बन चुकी है, लेकिन उसके बाद सर्च कमेटी के एक अन्य सदस्य का नाम भी तक सामने नहीं आने के चलते विलंब हो रहा है।

डीओसी की कुर्सी और भूमिका दोनों...
डीओसी की कुर्सी खाली है और भूमिका में फिलहाल कोई भी नहीं है। इसकी वजह से विवि के साथ ही कालेजों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं पर भी सीधा असर पड़ रहा है। जाहिर है कि कालेजों के नये कोर्स, शिक्षकों की पदोन्नति, निरीक्षण कार्रवाई के अलावा वर्तमान में कोविड जैसे वातावरण के बीच डीओसी का काम कालेजों और प्रिंसीपल के साथ लाइजनिंग रखना है।

डीन ऑफ कालेजिज का पद खाली होने की वजह से पिछले दिनों केयू द्वारा आयोजित जिस वेबिनार में मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मुखातिब हुए थे, उस वेबिनार के साथ केयू के ढाई लाख विद्यार्थियों में से महज एक हजार और 600 विद्यार्थी ही जुड़ सके। बता दें कि केयू ने 6 जून और 18 जून को यह वेबिनार किये थे। सबसे चिंताजनक स्थिति तो शिक्षा मंत्री के वेबिनार के दौरान पैदा हुई थी,क्योंकि उसमें कुछेक विद्यार्थियों द्वारा भद्दे कमेंट भी शुरू कर दिये थे, जिन्हें बाद में केयू प्रशासन ने डिलीट कराया था।

जुलाई के पहले सप्ताह में उम्मीद : डॉ. साहनी
इस संदर्भ में केयू प्रशासन की ओर से हाल ही में दूसरी बार डीपीआर पदभार संभालने वाले डॉ. बृजेश साहनी ने माना कि डीओसी का पद इतने समय तक खाली रखना संस्थान के हित में नहीं है, इससे कोविड जैसी वैश्विक महामारी के चलते कई तरह की गतिविधियां बाधित हुई हैं। उन्होंने बताया कि डीओसी के पद पर नियुक्ति के लिये कार्रवाई चल रही है और उम्मीद है कि जुलाई के पहले सप्ताह में कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी को नये डीओसी मिलेंगे।
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