फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लाखों का सफाई बजट और नियमों के नाम पर ठेंगा

Wed, 02 Apr 2014 12:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कुरुक्षेत्र
विज्ञापन
विज्ञापन
लाखों का सफाई बजट, प्रबंध। फिर भी नियमों के  नाम पर ठेंगा। यह हाल कुरुक्षेत्र के प्राचीनतम तीर्थ पिहोवा का हैं। दो दिन पहले यहां तीन दिवसीय चैत्र-चौदस मेले का समापन हुआ।
विज्ञापन


प्रशासन ने मेले से पहले सफाई की पुख्ता व्यवस्था के दावे किए थे। इसकी सच्चाई मेले के दौरान और बाद में देखने को मिल रही है।

मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए लंगर लगाने वाली समाजसेवी संस्थाएं भी सड़क किनारे प्रतिबंधित पालीथिन, थरमोकोल, प्लास्टिक के  चम्मच, गिलास जगह-जगह बिखेरने में पीछे नहीं रहीं।

मेले में 100 से अधिक अस्थायी सफाई कर्मी तैनात किए गए थे। इन पर लाखों रुपये खर्च किए जाने का अनुमान खुद नगर परिषद के अधिकारी लगा रहे हैं।

मेले के दौरान सड़कों पर फैली गंदगी के अलावा प्रतिबंधित पालीथिन, थरमोकोल और प्लास्टिक के गिलास, चम्मच मेला क्षेत्र में चौतरफा बिखरे दिखाई दिए।

कुरुक्षेत्र प्रशासन की ओर से पालीथिन, थरमोकोल और प्लास्टिक के गिलास, चम्मच और प्लेटों की बिक्री एवं उपयोग करने वालों पर कार्रवाई के निर्देश कई बार दिए जा चुके हैं, लेकिन मेले में इन निर्देशों की सरेआम धज्जियां उड़ीं।
विज्ञापन


लिहाजा, सरस्वती के पवित्र जल में भी पालीथिन तैरते नजर आए। इतना ही नहीं, मेला प्रशासन ने सफाई के लाख दावे के बावजूद मेला क्षेत्र में एसडीएम दफ्तर के आसपास और बाल भवन परिसर में कांग्रेस घास की भरमार नजर आई। बाल भवन में लगे झूलों के इर्द-गिर्द लगी कांग्रेस घास बच्चों एवं अन्य लोगों के स्वास्थ्य पर कितना दुष्प्रभाव डाल रही है, इससे अधिकारी अनजान बने हैं।

मेला प्रशासन ने चैत्र-चौदस मेले के दौरान इसी बाल भवन में मीडिया सेंटर बनाया हुआ था, जहां कांग्रेस घास आने वालों का स्वागत करती है।      

मेले में कोई चालान नहीं काटा : नगर पालिका
नगर पालिका के सचिव निर्मल प्रकाश से जब सफाई प्रबंधों और प्रतिबंधित सामग्री के चालान के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि मेले में 100 से अधिक सफाई कर्मी लगाए गए थे, जो मेले के 10 दिन बाद तक अपनी सेवाएं देंगे। सफाई पर चार से पांच लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है।

जब पालीथिन, थरमोकोल, प्लास्टिक के गिलास, प्लेट और चम्मच पर प्रतिबंध की बात की गई तो बोले कि मेले में व्यवस्था और दूसरे कामों में व्यस्त होने के कारण इस दौरान कोई चालान नहीं काटा गया। हालांकि, मेले से पहले रूटीन चेकिंग के दौरान चालान काटे गए थे।  

बेहद घातक है कांग्रेस घास : सीएमओ
जिले के चीफ मेडिकल आफिसर डॉ. जेएस ग्रेवाल के मुताबिक कांग्रेस घास का बायोलोजिकल नाम पार्थेनियम हेसेटेरिक्स है। इसका जबरदस्त असर संवेदनशील चमड़ी वाले लोगों के लिए बेहद घातक है।

उनके मुताबिक इसके दुष्प्रभाव से जलन, लालिमा एवं खुजली के गंभीर रोग होने का खतरा रहता है। यदि किसी रोगी का श्वसन तंत्र इसके प्रति संवेदनशील हो जाए, तो उसे सांस की तकलीफ हो सकती है।

इसमें रोगी को जीवनभर एलर्जी से पीड़ित होने पर सांस के माध्यम से लिए जाने वाली दवाई (इनहेलर) का इस्तेमाल करना पड़ता है।

यदि व्यक्ति की आंख, नाक और गला इससे संवेदनशील हो जाए तो आंखों से पानी बहने, लगातार छींके, जुकाम एवं गले में दर्द और खरास रहने की स्थिति बन सकती है।   

रोग लेने नहीं, पुण्य के लिए आते हैं यात्री : ग्रीन अर्थ
पर्यावरण के लिए कार्य कर रही संस्था ग्रीन अर्थ के पदाधिकारी नरेश भारद्वाज के मुताबिक राज्य सरकार ने पालीथिन, थरमोकोल और प्लास्टिक से बने कप, प्लेट, चम्मच और गिलासों पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध है।

मेला क्षेत्र में कांग्रेस घास की सफाई न होना प्रशासन की अव्यवस्था की पोल खोलता है। उन्होंने कहा कि लोग मेले में पुण्य कमाने के लिए आते हैं, लेकिन अव्यवस्था के चलते वे कई रोगों का शिकार होकर जाते हैं।
विज्ञापन


उन्होंने प्रशासन से मांग की कि कांग्रेस घास की सफाई और प्रतिबंधित सामग्री के उपयोग को रोकने के लिए जिले भर में विशेष अभियान चलाया जाए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें