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अब 'आप' में परिवारवाद, दागी की पत्नी को टिकट

Fri, 28 Feb 2014 10:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कुरुक्षेत्र
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आम आदमी पार्टी ने कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट से भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी की पत्नी बलविंदर कौर को टिकट सौंपा है।
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दरअसल, आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल से निकटता के चलते इस सीट को काफी पहले से ही चढ़ूनी के लिए पक्का माना जा रहा था, लेकिन चढ़ूनी के आपराधिक मामले में करीब चार साल हिसार, करनाल और अंबाला जेल में सजा काटने के कारण टिकट देने में पेंच फंसा था। लिहाजा, बुधवार को कुरुक्षेत्र लोकसभा क्षेत्र से आम आदमी पार्टी ने चढ़ूनी की दसवीं कक्षा पास पत्नी को टिकट देने की घोषणा कर दी।

चढ़ूनी विरोधी खेमे और आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं की मानें तो बलविंदर कौर को टिकट देना केजरीवाल की पार्टी में तानाशाही रवैये की जीवंत मिसाल है।
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टिकट की घोषणा के बाद विरोधी खेमे ने केजरीवाल के आवास पर धरना देने के लिए गुप्त बैठक भी की। फिलहाल, भाकियू नेता की पत्नी को टिकट देने से चुनावी महाभारत से पहले ही घमासान शुरू हो गया है।

आप कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनकी पार्टी में रायशुमारी के नाम पर सिर्फ दिखावा हो रहा है, जबकि रायशुमारी नाम की चीज लोकसभा के टिकट वितरण में कहीं नजर नहीं आती।

आरोप ये भी है कि राजनीति में अपराध एवं वंशवाद के खिलाफ अभियान चलाकर साफ राजनीति करने का दावा करने वाली आम आदमी पार्टी हरियाणा में शुरूआत में ही अपने मुख्य एजेंडे से भटकती दिख रही है। आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं का सीधा इशारा भाकियू प्रदेशाध्यक्ष की ओर था।

चढ़ूनी की रणनीति हुई सफल
आम आदमी पार्टी के गठन के बाद 2013 में अरविंद केजरीवाल और उनके साथी गोपाल राय का कुरुक्षेत्र में पहला कार्यक्रम भाकियू प्रदेशाध्यक्ष चढ़ूनी  ने ही आयोजित कराया था।

चढ़ूनी के आम आदमी पार्टी से चुनाव लड़ने की चर्चाएं तभी शुरू हो गई थीं, लेकिन तब ये कार्यक्रम किसान बैनर के तले किया गया था। लिहाजा, चढ़ूनी ने खुलकर अपनी इच्छा जाहिर नहीं की थी।

वहीं, दिसंबर 2013 में दिल्ली चुनावों के परिणाम आने और केजरीवाल की सफलता को भांपते चढ़ुनी ने आप का खुले तौर पर समर्थन शुरू कर दिया था। बकौल, चढ़ूनी वे इस समय आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में विशेष आमंत्रित सदस्य हैं।

कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट से जिन लोगों ने आम आदमी पार्टी की टिकट के लिए आवेदन किया है, उनमें भाकियू प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी भी थे, लेकिन उनकी पत्नी का नहीं था।


पौने चार साल जेल में रहे चढ़ूनी
1978 में आपराधिक धाराओं में नामजद भाकियू नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी अलग-अलग जेलों में सजा काट चुके हैं। हालांकि, जब उन्हें ये सजा हुई थी, वे नाबालिग थे।

लिहाजा, उन्हें हिसार की बोस्टल जेल (बाल सुधार गृह) में रखा गया था, लेकिन सजा के दौरान उनके बालिग होने के बाद चढ़ूनी करनाल और अंबाला की जेलों में भी बंद रहे।

इसके अलावा धारा-144 में भी डेढ़ माह जेल में बंद रहे, जबकि किसान आंदोलनों में भी उनके खिलाफ कई केस दर्ज हुए।

मामले तो केजरीवाल पर भी दर्ज हैं: चढ़ूनी
भाकियू प्रदेशाध्यक्ष चढ़ूनी ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि उन्हें गांव में झगड़े में दोषी पाए जाने पर पांच साल की सजा हुई थी। इस मामले में वह करीब पौने चार साल की सजा काट चुके हैं, जबकि किसान आंदोलन में धारा 144 तोड़ने पर जेल भेजा गया था।

इस मामले में जमानत नहीं ली थी, जिसके कारण डेढ़ माह तक जेल में रहे। उन्होंने माना कि किसान आंदोलन के दौरान उन पर कई केस दर्ज हुए हैं, लेकिन ये कोई आपराधिक मामले नहीं थे।

गांव में जो झगड़ा हुआ था, वे लोग अब शपथ पत्र देकर उन्हें ही वोट देने को तैयार हैं। चढ़ूनी के अनुसार आंदोलनों के दौरान तो कई मामले केजरीवाल और दूसरे कई नेताओं पर भी दर्ज हो चुके हैं।

दोनों बार चढ़ूनी के बुलावे पर आए केजरीवाल
मार्च 2013 और 21 फरवरी 2014 को अरविंद केजरीवाल गुरनाम सिंह चढ़ूनी के बुलावे पर कुरुक्षेत्र में आए।

पहली बार मार्च 2013 में जहां भाकियू की जनसभा में चढ़ूनी ने केजरीवाल को बुलाया, वहीं दूसरी बार 21 फरवरी को चढ़ूनी ने केजरीवाल को अपने पुत्र की शादी में आमंत्रित किया था।

इन दोनों कार्यक्रमों में केजरीवाल के शिरकत करने से ये कहीं न कहीं माना जा रहा था कि इस निकटता का लाभ चढ़ूनी को मिलेगा, लेकिन चढ़ूनी विरोधी टिकट कटवाने के लिए सक्रिय हो गए थे।  

रातों रात पत्नी का फार्म स्कैन, 24 घंटे में टिकट
पुराने बस अड्डे के पास एक आप नेता के आवास पर गुप्त बैठक हुई। इसमें यमुनानगर और आसपास क्षेत्रों के महिला एवं पुरुष कार्यकर्ता लामबद्ध हुए।

यहां चढ़ूनी की पत्नी को टिकट देने के खिलाफ आगामी रणनीति बनाई गई। पता चला है कि यहां पर चरणजीत गिल, दीपक देवगण, राजकुमार शर्मा, राजीव सान्याल, अणुकांत सहित अन्य कई नेता उपस्थित रहे।

इस मौके पर राजपाल ने कहा कि टिकट की घोषणा से कार्यकर्ताओं में निराशा है, क्योंकि बलविंदर कौर का फार्म बुधवार को ही स्कैन करके भेजा गया, वीरवार को टिकट दे दी गई, जबकि आठ फरवरी के बाद से आवेदन प्रक्रिया बंद थी।

बलविंदर कौर चढ़ूनी का प्रोफाइल
बलविंदर कौर के पति गुरनाम सिंह चढूनी भारतीय किसान यूनियन हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष हैं। चढ़ूनी के मुताबिक बलविंदर कौर 2001 से भारतीय किसान यूनियन में महिला विंग की प्रधान हैं।

इनेलो के शासनकाल में 2002 में शाहाबाद शुगर मिल में हुए चुनावों की धांधली में मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला के खिलाफ प्रदर्शन के कारण उन्हें 9 दिन तक सेंट्रल जेल अंबाला में बिताना पड़ा।
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किसानों द्वारा किए जाने वाले आंदोलनों में बलविंदर कौर बढ़चढ़ कर हिस्सा लेती हैं और ग्रामीण महिलाओं को भी अपने साथ लेकर चलती हैं। शैक्षणिक योग्यता 10वीं हैं।

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